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✦ दामोदराष्टकम् — सम्पूर्ण ८ श्लोक ✦
नमामीश्वरं सच्चिदानन्दरूपम्
लसत्कुण्डलं गोकुले भ्राजमानम्।
मैं उस ईश्वर को नमस्कार करता हूँ जो सच्चिदानन्द-स्वरूप हैं और गोकुल में चमकते कुण्डलों के साथ विराजमान हैं।
॥ श्लोक १ ॥
सच्चिदानन्द-रूप — बाल-दामोदर
नमामीश्वरं सच्चिदानन्दरूपं
लसत्कुण्डलं गोकुले भ्राजमानम्।
यशोदाभियोलूखलाद्धावमानं
परामृष्टमत्यन्ततो दृत्यगोप्यः॥
Namāmīśvaraṃ Saccidānanda-Rūpaṃ Lasat-Kuṇḍalaṃ Gokule Bhrāja-Mānam | Yaśodābhiyolūkhalād-Dhāvamānaṃ Parāmṛṣṭam-Atyantato Dṛtya-Gopyaḥ
नमामीश्वरं सच्चिदानन्दरूपम्
मैं उस सच्चिदानन्द-स्वरूप ईश्वर को नमस्कार करता हूँ — जो गोकुल में चमकते कुण्डलों से सुशोभित हैं। माँ यशोदा के भय से ओखल से भागते हुए, गोपियों द्वारा पकड़ लिए गए जो बाल-दामोदर हैं।
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॥ श्लोक २ ॥
रुदत्कृष्ण — यशोदा की ममता
रुदन्तं मुहुर्नेत्रयुग्मं मृजन्तं
कराम्भोजयुग्मेन सातङ्कनेत्रम्।
मुहुः श्वासकम्पत्रिरेखाङ्ककण्ठ-
स्थितग्राससंभ्रान्तचेतः स्मरामि॥
Rudantaṃ Muhur-Netra-Yugmaṃ Mṛjantaṃ Karāmbhoja-Yugmena Sātaṅka-Netram | Muhuḥ Śvāsa-Kampa-Tri-Rekhāṅka-Kaṇṭha-Sthita-Grāsa-Saṃbhrānta-Cetaḥ Smarāmi
नमामीश्वरं सच्चिदानन्दरूपम्
मैं उन्हें याद करता हूँ — जो रोते-रोते बार-बार अपने कमल-नेत्रों को दोनों हाथों से पोंछ रहे हैं। जिनकी आँखों में भय है, साँस लेते समय तीन रेखाओं वाले कण्ठ में निवाला अटक रहा है और चित्त व्याकुल है।
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॥ श्लोक ३ ॥
इतीद्रिक् — रस्सी से बाँधना
इतीद्रिक्स्वलीलाभिरानन्दकुण्डे
स्वघोषं निमज्ज्यन्तमाख्यापयन्तम्।
तदीयेषितज्ञेषु भक्तैर्जुषाणं
कृताम्भोजनेत्रं परं नौमि विष्णुम्॥
Itīdrik-Svalīlābhir-Ānanda-Kuṇḍe Svaghoṣaṃ Nimajjyantam-Ākhyāpayantam | Tadīyeṣita-Jñeṣu Bhaktair-Juṣāṇaṃ Kṛtāmbhoja-Netraṃ Paraṃ Naumi Viṣṇum
नमामीश्वरं सच्चिदानन्दरूपम्
इस प्रकार की लीलाओं से अपने गोकुल को आनन्द-सरोवर में डुबो देने वाले, अपने भक्तों की इच्छा जानने वालों द्वारा सेवित, कमल-नेत्र उस परम विष्णु को मैं नमस्कार करता हूँ।
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॥ श्लोक ४ ॥
वरं देव — माँ यशोदा का वर
वरं देव मोक्षं न मोक्षावधिं वा
न चान्यं वृणेऽहं वरेशाद्विपादात्।
इदं ते वपुर्नाथ गोपालबालं
सदा मे मनस्याविरास्तां किमन्यैः॥
Varaṃ Deva Mokṣaṃ Na Mokṣāvadhiṃ Vā Na Cānyaṃ Vṛṇe'haṃ Vareśād-Vipādāt | Idaṃ Te Vapur-Nātha Gopāla-Bālaṃ Sadā Me Manasy-Āvirāstāṃ Kimanyaiḥ
नमामीश्वरं सच्चिदानन्दरूपम्
हे देव! मुझे मोक्ष नहीं चाहिए, मोक्ष की सीमा भी नहीं। आपके चरणों के अतिरिक्त कोई वर नहीं माँगता। हे नाथ! आपका यह गोपाल-बाल-रूप सदा मेरे मन में प्रकट रहे — और क्या चाहिए?
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॥ श्लोक ५ ॥
इदं ते मुखं — मुख की शोभा
इदं ते मुखाम्भोजमत्यन्तनीलैः
वृतं कुन्तलैः स्निग्धरक्तैश्च गोप्या।
मुहुश्चुम्बितं बिम्बरक्ताधरं मे
मनस्याविरास्तामलं लक्षलाभैः॥
Idaṃ Te Mukhāmbhojam-Atyanta-Nīlaiḥ Vṛtaṃ Kuntalaiḥ Snigdha-Raktaiś-Ca Gopyā | Muhuś-Cumbita Bimba-Raktādhraṃ Me Manasy-Āvirāstām-Alaṃ Lakṣa-Lābhaiḥ
नमामीश्वरं सच्चिदानन्दरूपम्
आपका यह कमल-मुख जो अत्यन्त नीले घुंघराले बालों से घिरा है — जिसे माँ यशोदा बार-बार चूमती हैं, जिसके बिम्ब जैसे लाल अधर हैं — वह सदा मेरे मन में प्रकट रहे। लाखों लाभ भी इसके सामने व्यर्थ हैं।
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॥ श्लोक ६ ॥
नमो देव — पञ्च-नमस्कार
नमो देव दामोदरानन्त विष्णो
प्रसीद प्रभो दुःखजालाब्धिमग्नम्।
कृपादृष्टिवृष्ट्यातिदीनं बतानु
गृहाणेशं मामज्ञमेध्यक्षिदृष्ट्या॥
Namo Deva Dāmodarānanta Viṣṇo Prasīda Prabho Duḥkha-Jālābdhi-Magnam | Kṛpā-Dṛṣṭi-Vṛṣṭyāti-Dīnaṃ Batānu Gṛhāṇeśaṃ Māmajñam-Edhyakṣi-Dṛṣṭyā
नमामीश्वरं सच्चिदानन्दरूपम्
हे दामोदर! हे अनन्त! हे विष्णु! आपको नमस्कार। हे प्रभु! दुखों के जाल में डूबे इस अत्यन्त दीन, अज्ञानी मुझ पर अपनी कृपा-दृष्टि की वर्षा करके प्रसन्न होइए और स्वीकार कीजिए।
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॥ श्लोक ७ ॥
कुवेरात्मजौ — यमलार्जुन मोक्ष
कुवेरात्मजौ बद्धमूर्त्याधिपस्त्वं
त्वयैव प्रोक्तौ मोक्षितौ भक्तिभाजौ।
त्वयैव पुनर्भक्तियोगस्तु तेभ्यो
दत्तो यस्मात्ते त्वां नमामि दामोदर॥
Kuverātmajau Baddha-Mūrtyādhipas-Tvaṃ Tvayaiva Proktau Mokṣitau Bhakti-Bhājau | Tvayaiva Punar-Bhakti-Yogas-Tu Tebhyo Datto Yasmāt-Te Tvāṃ Namāmi Dāmodara
नमामीश्वरं सच्चिदानन्दरूपम्
हे दामोदर! आपने ही कुवेर के दोनों पुत्रों (नलकूवर-मणिग्रीव) को — जो वृक्ष बने हुए थे — मुक्त किया और उन्हें भक्तियोग प्रदान किया। इसीलिए मैं आपको नमस्कार करता हूँ।
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॥ श्लोक ८ ॥
नमस्तेऽस्तु दाम्ने — भक्तिदान-प्रार्थना
नमस्तेऽस्तु दाम्ने स्फुरद्दीप्तिधाम्ने
त्वदीयोदरायाथ विश्वस्य धाम्ने।
नमो राधिकायै त्वदीयप्रियायै
नमोऽनन्तलीलाय देवाय तुभ्यम्॥
Namaste'stu Dāmne Sphurad-Dīpti-Dhāmne Tvadīyodarāyātha Viśvasya Dhāmne | Namo Rādhikāyai Tvadīya-Priyāyai Namo'nanta-Līlāya Devāya Tubhyam
नमामीश्वरं सच्चिदानन्दरूपम्
उस चमकती हुई तेजोमय रस्सी को नमस्कार! आपके उदर को नमस्कार — जो सम्पूर्ण विश्व का धाम है! आपकी प्रिया राधिका को नमस्कार! हे अनन्त-लीलाओं वाले देव — आपको नमस्कार!
✦ दामोदराष्टक फल — Damodara Phala ✦
दामोदराष्टकमिदं प्रियदामोदरस्य।
यः पठेत् कार्तिके मासि दीपदानसमन्वितः॥
भक्तिं परां प्रयच्छन्तं स्वयमेव हरेः पदम्।
प्राप्नोत्यन्तत एवासौ कृष्णप्रेमाम्बुधिं नरः॥
Dāmodarāṣṭakam-Idaṃ Priya-Dāmodarasya | Yaḥ Paṭhet Kārtike Māsi Dīpa-Dāna-Samanvitaḥ
जो कार्तिक मास में दीप-दान के साथ इस प्रिय-दामोदर के इस अष्टकम् का पाठ करता है — वह परम भक्ति प्राप्त करके अन्त में श्रीकृष्ण-प्रेम के सागर में लीन हो जाता है।