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✦ कलियुग का सर्वोच्च मंत्र ✦

Hare Krishna Mahamantra

हरे कृष्ण महामंत्र
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श्रीमद् भागवत और कलिसंतरण उपनिषद् में वर्णित — कलियुग में मोक्ष का एकमात्र सुलभ मार्ग। १६ नाम, ३२ अक्षर, अनन्त शक्ति।

कलिसंतरण उपनिषद् • १६ नाम • ३२ अक्षर
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण🪈 कृष्ण कृष्ण हरे हरे🪈 हरे राम हरे राम🪈 राम राम हरे हरे🪈 जय श्री कृष्ण🪈 राधे राधे🪈 हरे कृष्ण हरे कृष्ण🪈 कृष्ण कृष्ण हरे हरे🪈 हरे राम हरे राम🪈 राम राम हरे हरे🪈 जय श्री कृष्ण🪈 राधे राधे🪈
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✦ हरे कृष्ण महामंत्र — सम्पूर्ण विवरण ✦
✦ महामंत्र ✦
हरे कृष्ण हरे कृष्ण
कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम
राम राम हरे हरे
Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare |
Hare Rāma Hare Rāma Rāma Rāma Hare Hare ||
१६ नाम ३२ अक्षर कलियुग मंत्र महामंत्र
✦ अर्थ
तीन नामों का अर्थ
हरे — राधा (हर) की पुकार, या जो हर ले (हरण करे) दुख।
कृष्ण — जो अपनी ओर खींचे, आकर्षित करे।
राम — जो आनन्द में रमण करे, रमाने वाला॥
"हरे" — यह राधा का नाम भी है और "हरण करने वाले" का अर्थ भी देता है — जो मन से समस्त दुख और माया हर ले। "कृष्ण" — सर्वाकर्षक, जो समस्त चेतनाओं को अपनी ओर खींचता है। "राम" — परम आनन्दस्वरूप, जिसमें ब्रह्म रमण करता है।
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॥ श्रोत ॥
कलिसंतरण उपनिषद्
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
इति षोडशकं नाम्नां कलिकल्मषनाशनम्।
नातः परतरोपायः सर्ववेदेषु दृश्यते॥
इति षोडशकं नाम्नां कलिकल्मषनाशनम्
कलिसंतरण उपनिषद् में ब्रह्मा ने नारद को बताया — "यह सोलह नामों का महामंत्र कलियुग के समस्त पापों का नाशक है। सम्पूर्ण वेदों में इससे श्रेष्ठ कोई उपाय नहीं दिखता।"
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✦ महामंत्र के १६ नाम ✦
नाम १
हरे
Hare
नाम २
कृष्ण
Krishna
नाम ३
हरे
Hare
नाम ४
कृष्ण
Krishna
नाम ५
कृष्ण
Krishna
नाम ६
कृष्ण
Krishna
नाम ७
हरे
Hare
नाम ८
हरे
Hare
नाम ९
हरे
Hare
नाम १०
राम
Rama
नाम ११
हरे
Hare
नाम १२
राम
Rama
नाम १३
राम
Rama
नाम १४
राम
Rama
नाम १५
हरे
Hare
नाम १६
हरे
Hare
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॥ श्रीमद् भागवत ॥
नाम-संकीर्तन की महिमा
कलेर्दोषनिधे राजन्नस्ति ह्येको महान् गुणः।
कीर्तनादेव कृष्णस्य मुक्तसंगः परं व्रजेत्॥
कीर्तनादेव कृष्णस्य मुक्तसंगः परं व्रजेत्
हे राजन्! दोषों से भरे इस कलियुग में एक महान् गुण है — केवल कृष्ण के कीर्तन मात्र से मनुष्य सभी बंधनों से मुक्त होकर परम धाम को प्राप्त होता है।
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॥ चैतन्य महाप्रभु ॥
शिक्षाष्टक — प्रथम श्लोक
चेतोदर्पणमार्जनं भवमहादावाग्निनिर्वापणं
श्रेयःकैरवचन्द्रिकावितरणं विद्यावधूजीवनम्।
आनन्दाम्बुधिवर्धनं प्रतिपदं पूर्णामृतास्वादनं
सर्वात्मस्नपनं परं विजयते श्रीकृष्णसंकीर्तनम्॥
परं विजयते श्रीकृष्णसंकीर्तनम्
श्री कृष्ण संकीर्तन — चित्त-दर्पण को माँजता है, संसाररूपी महादावाग्नि को बुझाता है, कल्याण की चाँदनी फैलाता है, विद्या को जीवन देता है, आनन्द-सागर को बढ़ाता है, प्रतिपल पूर्ण अमृत का स्वाद देता है — इस श्री कृष्ण संकीर्तन की सर्वोच्च जय हो।
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॥ जप विधि ॥
महामंत्र जप की विधि
नाम्नाम् अकारि बहुधा निजसर्वशक्तिः
तत्रार्पिता नियमितः स्मरणे न कालः।
एतादृशी तव कृपा भगवन् ममापि
दुर्दैवमीदृशमिहाजनि नानुरागः॥
नाम्नाम् अकारि बहुधा निजसर्वशक्तिः
हे भगवन्! आपने अपनी समस्त शक्तियाँ अपने नामों में निहित की हैं — स्मरण के लिए कोई विशेष नियम नहीं बनाया। यही आपकी कृपा है। परंतु मेरा दुर्भाग्य है कि मुझे इनमें अनुराग नहीं।
✦ महामंत्र की महिमा ✦
हरेर्नाम हरेर्नाम हरेर्नामैव केवलम्।
कलौ नास्त्येव नास्त्येव नास्त्येव गतिरन्यथा॥
कलियुग में केवल हरि का नाम, हरि का नाम, हरि का नाम ही एकमात्र मार्ग है। इसके अतिरिक्त कोई और गति नहीं है, नहीं है, नहीं है। — बृहन्नारदीय पुराण

🪈 हरे कृष्ण महामंत्र — परिचय

हरे कृष्ण महामंत्र वैदिक परम्परा में "महामंत्र" के नाम से विख्यात है। यह कलिसंतरण उपनिषद् में नारद और ब्रह्मा के संवाद में वर्णित है। इसमें तीन दिव्य नाम हैं — हरे (राधा / हरण करने वाला), कृष्ण और राम — जो मिलकर १६ बार आते हैं और ३२ अक्षरों में समाहित हैं।

चैतन्य महाप्रभु (१४८६-१५३४) ने इस महामंत्र को सार्वजनिक संकीर्तन के माध्यम से बंगाल और उड़ीसा में फैलाया। ISKCON के संस्थापक श्रील प्रभुपाद ने इसे विश्व के कोने-कोने में पहुँचाया।

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कलिसंतरण उपनिषद्ब्रह्मा ने नारद को कहा — यह महामंत्र कलियुग के समस्त पापों का नाशक है और इससे श्रेष्ठ वेदों में कोई उपाय नहीं।
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चैतन्य महाप्रभुमहाप्रभु ने इस मंत्र को नगर-संकीर्तन के रूप में प्रचारित किया — यह मंत्र गाने, सुनने और सुनाने मात्र से फल देता है।
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तीन नाम — तीन शक्तियाँहरे = राधा की शक्ति (ह्लादिनी शक्ति), कृष्ण = चित् शक्ति, राम = सत् शक्ति — तीनों मिलकर सम्पूर्णता देते हैं।
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एक माला = १०८ बारप्रतिदिन १६ माला (१७२८ बार) जप गौड़ीय वैष्णव परम्परा में दीक्षित भक्त का न्यूनतम नियम है।
HARE KRISHNA MAHAMANTRA
१६ नाम • महामंत्र