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✦ द्वादशाक्षर मंत्र — सम्पूर्ण विवेचन ✦
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
Oṃ Namo Bhagavate Vāsudevāya
हे वासुदेव (सर्वव्यापी परम ब्रह्म)! हे भगवान (षड्गुण सम्पन्न)! आपको मेरा नमस्कार — मैं आपकी शरण में हूँ।
✦ द्वादश अक्षर — बारह दिव्य बीज ✦
प्रत्येक अक्षर एक विष्णु-नाम का बीज है • Each syllable is a seed of Vishnu's name
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✦ पद-विश्लेषण — Word by Word ✦
ॐ
Oṃ — प्रणवपरम ब्रह्म का वाचक बीज मंत्र। सम्पूर्ण सृष्टि इसी नाद से उत्पन्न हुई। अतीत, वर्तमान और भविष्य — तीनों कालों का सार।
नमः
Namaḥ — नमस्कार / समर्पण"न" + "म" — अर्थात् "न मम" (यह मेरा नहीं)। यह अहंकार के त्याग और पूर्ण समर्पण का भाव है। अपने अस्तित्व को भगवान में विलीन करना।
भगवते
Bhagavate — भगवान कोभग = ऐश्वर्य। जो षड् गुणों — ऐश्वर्य, वीर्य, यश, श्री, ज्ञान और वैराग्य — से सम्पन्न हैं। पराशर मुनि के अनुसार इन छः गुणों का पूर्ण योग ही "भगवान" है।
वासुदेवाय
Vāsudevāya — वासुदेव कोवसु = सर्वत्र वास करने वाले। "वसति सर्वत्र इति वासुदेवः" — जो सब में निवास करते हैं वे वासुदेव हैं। वसुदेव-पुत्र श्रीकृष्ण का नाम और परमात्मा का वाचक।
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✦ द्वादश विष्णु-नाम — Twelve Vishnu Names ✦
ॐ मधुसूदनाय नमः
Madhusudana
ॐ त्रिविक्रमाय नमः
Trivikrama
ॐ हृषीकेशाय नमः
Hrishikesha
ॐ पद्मनाभाय नमः
Padmanabha
द्वादशाक्षर मंत्र के बारह अक्षर इन बारह नामों के बीज हैं —
जप के साथ इन नामों का स्मरण विशेष फलदायी है।
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✦ जप विधान — Jap Vidhan ✦
१०८
माला
एक माला — नित्य पाठ के लिए न्यूनतम जप
१०८०
दस माला
विशेष अनुष्ठान या एकादशी को
१२५०००
पुरश्चरण
सम्पूर्ण सिद्धि के लिए सवा लाख जप
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✦ मंत्र शक्ति — Mantra Shakti ✦
भागवत
भागवत पुराण का मूल मंत्रश्रीमद्भागवत पुराण में नारद मुनि ने इस मंत्र को ध्रुव को दिया था। यह महापुराण का केन्द्रीय मंत्र है।
द्वादश
१२ — द्वादश का महत्वबारह महीने, बारह राशियाँ, बारह ज्योतिर्लिंग — संख्या १२ पूर्णता का प्रतीक है। इस मंत्र के १२ अक्षर ब्रह्माण्ड की पूर्णता को दर्शाते हैं।
मोक्ष
मोक्षदायक — Liberationयह मंत्र जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति दिलाता है। मृत्यु के समय इस मंत्र का स्मरण करने वाले को मोक्ष प्राप्त होता है।
✦ फलश्रुति — Phala Shruti ✦
एतन्नामसहस्रस्य पुण्यस्य विष्णोर्महात्मनः।
षड्भिर्मासैः पठन्नित्यं पापं यत्पूर्वसञ्चितम्॥
नाशयत्याशु पुरुषो नात्र कार्या विचारणा।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय — मोक्षदायकं परम्॥
Etan-Nāma-Sahasrasya Puṇyasya Viṣṇor-Mahātmanaḥ | Ṣaḍbhir-Māsaiḥ Paṭhan-Nityaṃ Pāpaṃ Yat-Pūrva-Sañcitam
विष्णु के महात्म्य के इस पवित्र नाम-मंत्र का जो नित्य जप करता है, वह छः महीनों में पूर्वजन्म के संचित पाप को नष्ट कर देता है — इसमें कोई संशय नहीं। "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" परम मोक्षदायक मंत्र है।
🌀 द्वादशाक्षर मंत्र — परिचय
द्वादशाक्षर मंत्र "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" भगवान विष्णु (वासुदेव) का सर्वश्रेष्ठ मंत्र है। यह श्रीमद्भागवत पुराण का मूल मंत्र है जो नारद मुनि ने बालक ध्रुव को प्रदान किया था। ध्रुव ने इसी मंत्र की साधना से भगवान का साक्षात्कार किया।
इस मंत्र के बारह अक्षर भगवान विष्णु के बारह नामों के बीज हैं। यह मंत्र वैष्णव सम्प्रदाय में दीक्षा-मंत्र के रूप में भी प्रदान किया जाता है।
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नारद-ध्रुव संवादभागवत पुराण के चतुर्थ स्कन्ध में नारद मुनि ने बालक ध्रुव को यह द्वादशाक्षर मंत्र दिया था। पाँच वर्षीय ध्रुव ने इसी से सिद्धि प्राप्त की।
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सर्वव्यापी वासुदेववासुदेव = वसु (सब में वास करने वाले) + देव। यह नाम बताता है कि परमात्मा सब जीवों में, सब स्थानों में व्याप्त हैं।
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दीक्षा मंत्रयह मंत्र वैष्णव परम्परा में गुरु द्वारा शिष्य को दीक्षा में दिया जाता है। रामानुज, माधव, वल्लभ सभी आचार्यों ने इसे सर्वश्रेष्ठ माना।
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एकादशी का विशेष महत्वएकादशी व्रत के दिन इस मंत्र का अधिकाधिक जप करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा और मोक्ष की प्राप्ति होती है।