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✦ विद्यापति विरचितम् ✦

Hum Nahi Shiv Sang Gauri Biahb

हम नहि शिव सँ गौरी बिआहब
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विद्यापति का यह मैथिली गीत पार्वती की दृष्टि से शिव के साथ विवाह की इच्छा को व्यक्त करता है। ई तपसि वर मोर न पसन्द — यह तपस्या का वरदान मेरे लिए पसंद नहीं।

रचयिता : श्री विद्यापति • मैथिली भाषा • शिव-पार्वती लीलागीत
हम नहि शिव सँ गौरी बिआहब, ई तपसि वर मोर न पसन्द
हम नहि शिव सँ गौरी बिआहब💫 ई तपसि वर मोर न पसन्द💫 हम नहि शिव सँ गौरी बिआहब💫
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✦ हम नहि शिव सँ गौरी बिआहब — विद्यापति का मैथिली गीत ✦
॥ पद १ ॥
पार्वती की इच्छा
हम नहि शिव सँ गौरी बिआहब,
ई तपसि वर मोर न पसन्द मोर कतए गेलाह
Hum Nahi Shiv Sang Gauri Biahb, Ee Tapasi Var Mor N Pasand Mor Katae Gelah
मैं शिव के साथ गौरी (पार्वती) का विवाह नहीं चाहती। यह तपस्या का वरदान मेरे लिए पसंद नहीं है। मेरा प्रिय कहाँ गया है?
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✦ गीत का आशय ✦
विद्यापति द्वारा रचित यह गीत पार्वती की दृष्टि से शिव के साथ विवाह की जटिल भावनाओं को दर्शाता है।
Maithili Geet - Vidyapati • Parvati Ki Drishti • Shiv-Parvati Lila
यह गीत प्रेम की गहराई को दिखाता है जहाँ पार्वती शिव को चाहती है लेकिन तपस्या के माध्यम से प्राप्त विवाह उसे पसंद नहीं।

💫 हम नहि शिव सँ गौरी बिआहब — विद्यापति का गीत

यह गीत विद्यापति की रचनाओं में से एक है जो शिव-पार्वती की लीलाओं को मैथिली भाषा में प्रस्तुत करता है।

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