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✦ विद्यापति विरचितम् ✦

Koyal Kamal Kanth Jhar Jhar Kaanay

कोयल कमल कंठ झर झर कांनय
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विद्यापति का यह मैथिली गीत प्रकृति की सुंदरता और प्रेम की मधुरता को व्यक्त करता है। सावन मास आयल — सावन का महीना आया है।

रचयिता : श्री विद्यापति • मैथिली भाषा • प्रकृति-प्रेम गीत
कोयल कमल कंठ झर झर कांनय, सावन मास आयल
कोयल कमल कंठ झर झर कांनय🕊️ सावन मास आयल🕊️ कोयल कमल कंठ झर झर कांनय🕊️
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✦ कोयल कमल कंठ झर झर कांनय — विद्यापति का मैथिली गीत ✦
॥ पद १ ॥
सावन की सुंदरता
कोयल कमल कंठ झर झर कांनय,
सावन मास आयल मोर कतए गेलाह
Koyal Kamal Kanth Jhar Jhar Kaanay, Sawan Maas Ayal Mor Katae Gelah
कोयल कमल के कंठ से झर-झर बोल रही है, सावन का महीना आया है। मेरा प्रिय कहाँ गया है?
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✦ गीत का आशय ✦
विद्यापति द्वारा रचित यह गीत सावन ऋतु की खूबसूरती और प्रेम की मधुरता को दर्शाता है।
Maithili Geet - Vidyapati • Sawan Maas • Prakriti Prem
यह गीत प्रकृति की सुंदरता और प्रेम की गहराई को जोड़ता है, जहाँ सावन की बारिश प्रेम की याद दिलाती है।

🕊️ कोयल कमल कंठ झर झर कांनय — विद्यापति का गीत

यह गीत विद्यापति की प्रकृति-प्रेम रचनाओं में से एक है जो मैथिली भाषा की मधुरता को प्रदर्शित करता है।

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