विद्यापति का यह मैथिली गीत बृन्दावन की सुंदरता और कृष्ण की लीलाओं को व्यक्त करता है। बृन्दावन के मोर — वृन्दावन के मोर।
यह गीत विद्यापति की रचनाओं में बृन्दावन की लीलाओं को समर्पित है।