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✦ श्री हनुमान — दैनिक पूजा आरती ✦

Hanuman Aarti

॥ आरती कीजे हनुमान लला की ॥
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भगवान श्री हनुमान जी की यह आरती प्रतिदिन प्रातःकाल और सायंकाल आरती के समय गाई जाती है। मंगलवार और शनिवार को विशेष रूप से पाँच बार पढ़ने का विधान है।

नित्य पाठ • मंगलवार विशेष • पञ्च-आरती
आरती कीजे हनुमान लला की🪔 दुष्ट दलन रघुनाथ कला की🪔 जाके बल से गिरिवर काँपे🪔 रोग दोष जाके निकट न झाँके🪔 अंजनि पुत्र महा बलदाई🪔 संतन के प्रभु सदा सहाई🪔 आरती कीजे हनुमान लला की🪔 दुष्ट दलन रघुनाथ कला की🪔 जाके बल से गिरिवर काँपे🪔 रोग दोष जाके निकट न झाँके🪔
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✦ श्री हनुमान आरती — सम्पूर्ण ✦
✦ टेक (Refrain — हर बन्द के बाद) ✦
आरती कीजे हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
हनुमान जी की आरती कीजिए — जो दुष्टों के विनाशक और रघुनाथ (श्रीराम) की कला (शक्ति) के धाम हैं।
✦ प्रथम बन्द ✦
॥ १ ॥
जाके बल से गिरिवर काँपे।
रोग दोष जाके निकट न झाँके॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई।
संतन के प्रभु सदा सहाई॥
जिनके बल से पर्वत काँपते हैं, जिनके निकट रोग-दोष नहीं फटकते। हे अंजनी-पुत्र! आप महाबलशाली हैं और संतों के स्वामी, सदा सहायक हैं।
आरती कीजे हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
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✦ द्वितीय बन्द ✦
॥ २ ॥
देश विदेश जहाँ जहाँ जाओ।
दीन दयाल दया नहिं पाओ॥
मनसा पूजा करो हनुमाना।
भीड़ परे तब काज सवाँना॥
देश-विदेश जहाँ जाएँ — जहाँ दीनदयाल की दया न पाएँ, वहाँ मन से हनुमानजी की पूजा करें। जब संकट पड़े तब काम बनता है।
आरती कीजे हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
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✦ तृतीय बन्द ✦
॥ ३ ॥
चरण शरण कर जोरि मनावें।
यही उपाय भक्त अपनावें॥
जाके मन में राम विराजें।
ताके सकल संकट भागें भाजें॥
चरणों की शरण में हाथ जोड़कर मनाते हैं — यही उपाय भक्त अपनाते हैं। जिसके मन में राम विराजते हैं, उसके सभी संकट भाग जाते हैं।
आरती कीजे हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
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✦ चतुर्थ बन्द ✦
॥ ४ ॥
सब पर हनुमत अर्पण कीजे।
तन मन धन सब अर्पण कीजे॥
जो जन शरण तिहारी आवें।
ता कर सकल काज बन जावें॥
हनुमानजी को सब कुछ समर्पित कर दें — तन, मन, धन सब। जो भी आपकी शरण में आते हैं, उनके सभी काम बन जाते हैं।
आरती कीजे हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
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✦ पञ्चम बन्द ✦
॥ ५ ॥
आगे खड़े भये बजरंगी।
हाथ में गदा और रंग रंगी॥
राम लखन सीता लिए संगा।
हनुमत के मन रंग की तरंगा॥
बजरंगी आगे खड़े हुए, हाथ में गदा है और रंग-रंगे हैं। राम, लक्ष्मण, सीता को साथ लिए, हनुमानजी के मन में भक्ति की तरंगें उठ रही हैं।
आरती कीजे हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
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✦ षष्ठ बन्द ✦
॥ ६ ॥
मनसा पूजा करो हनुमाना।
भीड़ परे तब काज सुहाना॥
तुम महाराज करहु उपकारा।
जन के काज सदा रखवारा॥
मन से हनुमानजी की पूजा करें — संकट में सुंदर काम होता है। हे महाराज! उपकार कीजिए, अपने भक्तों के काम के सदा रक्षक बनिए।
आरती कीजे हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
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✦ समापन बन्द ✦
॥ ७ ॥
कंचन थाल विराजे सुन्दर।
मोती माला धूप दीपक मन्दर॥
श्रीराम हनुमान जी की आरती।
जो कोई नर गावे सुखकारती॥
ब्रह्मादि मुनिजन सदा विराजें।
अनन्त अपार यश महाराज के॥
सोने की थाली में मोती-माला, धूप, दीपक शोभायमान हैं। जो भी मनुष्य श्रीराम-हनुमानजी की यह आरती गाता है, उसे सुख मिलता है। ब्रह्मादि मुनि सदा विराजते हैं — महाराज का यश अनन्त और असीमित है।
आरती कीजे हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
✦ आरती प्रसाद मंत्र ✦
ॐ जय हनुमान गोसाईं, ॐ जय हनुमान गोसाईं।
राम दूत अतुलित बल धामा, जग में जस नाम पसारा॥

जय जय जय हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥
हे हनुमान गोसाईं! आपकी जय हो। श्रीराम के दूत असीम-बल के धाम, जगत में जिनका यश फैला हुआ है। जय, जय, जय! गुरुदेव के समान कृपा करें।
✦ आरती के बाद — श्री राम जय राम मंत्र ✦
श्री राम जय राम जय जय राम।
श्री राम जय राम जय जय राम॥
सीता राम सीता राम जय जय राम।
राधे श्याम राधे श्याम जय जय राम॥
हे श्रीराम! आपकी जय हो, जय हो, जय हो। यह हनुमानजी का सर्वाधिक प्रिय मंत्र है। आरती के बाद इसे १०८ बार जपना अत्यन्त फलदायी है।