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✦ महाकाली स्तोत्र — सम्पूर्ण ✦
देवी महात्म्यम् (मार्कण्डेय पुराण) के प्रथम चरित्र में सुरथ राजा और समाधि वैश्य को मेधस ऋषि ने यह कथा सुनाई। ब्रह्मा और देवताओं ने महाकाली की स्तुति की जब विष्णु की योगनिद्रा में मधु-कैटभ राक्षसों ने उत्पात मचाया। यह स्तोत्र उसी प्रसंग का है।
ॐ खड्गं चक्रगदेषुचापरिघाञ्छूलं भुशुण्डीं शिरः।
शङ्खं सन्दधतीं करैस्त्रिनयनां सर्वाङ्गभूषावृताम्।
नीलाश्मद्युतिमास्यपाददशकां सेवे महाकालिकाम्।
यामस्तौत् स्वपिते हरौ कमलजो हन्तुं मधुं कैटभम्॥
जिनके दस हाथों में खड्ग, चक्र, गदा, बाण, धनुष, परिघ, शूल, भुशुण्डी, शीश और शंख हैं — त्रिनेत्रा, सर्वाभूषणभूषिता, नीलपाषाण जैसी कान्ति वाली, दस मुख-दस पाद वाली महाकाली की मैं सेवा करता हूँ, जिनकी स्तुति विष्णु की योगनिद्रा में ब्रह्मा ने की।
॥ श्लोक १ ॥
नमस्ते सते — सर्वलोकाश्रय
नमस्ते सते सर्वलोकाश्रये
निरास्ते नमस्ते जगत्प्रतिपाले।
नमस्ते सते देवि चामुण्डिके
नमस्ते जगत् कारणे चण्डिके॥
Namaste Sate Sarva-Lokāśraye Nirāste Namaste Jagat-Pratipāle | Namaste Sate Devi Cāmuṇḍike Namaste Jagat Kāraṇe Caṇḍike
नमस्ते सते सर्वलोकाश्रये
हे सत्य-स्वरूपे! सर्व-लोकों की आश्रय-दात्री — नमस्कार। हे निरातंक! हे जगत्-पालिके — नमस्कार। हे देवी चामुण्डिके — नमस्कार। हे जगत् की कारण-स्वरूपा चण्डिके — नमस्कार।
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॥ श्लोक २ ॥
विद्युत् स्वरूपा — काल-रात्रि
नमस्ते जगत् संस्थिते देवि सर्व-
नमस्ते रणे दुर्जये पापहारे।
नमस्ते जले स्थले चापि देवि
नमस्ते शिवे सर्वसिद्धिप्रदायिनि॥
Namaste Jagat Saṃsthite Devi Sarva Namaste Raṇe Durjaye Pāpa-Hāre | Namaste Jale Sthale Cāpi Devi Namaste Śive Sarva-Siddhi-Pradāyini
नमस्ते सते सर्वलोकाश्रये
हे जगत् में सर्वत्र विद्यमान देवी — नमस्कार। रण में अजेय, पाप-हारिणी — नमस्कार। जल में, स्थल में — सर्वत्र हे देवी — नमस्कार। हे शिवे! सर्व-सिद्धि देने वाली — नमस्कार।
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॥ श्लोक ३ ॥
महामाया — ब्रह्माण्ड व्यापिनी
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
Yā Devī Sarva-Bhūteṣu Śakti-Rūpeṇa Saṃsthitā | Namastasyai Namastasyai Namastasyai Namo Namaḥ
नमस्ते सते सर्वलोकाश्रये
जो देवी समस्त प्राणियों में शक्ति-रूप से विद्यमान हैं — उन्हें नमस्कार, नमस्कार, नमस्कार, बारम्बार नमस्कार।
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॥ श्लोक ४ ॥
चेतना रूपा — बुद्धि-स्वरूपा
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
Yā Devī Sarva-Bhūteṣu Buddhi-Rūpeṇa Saṃsthitā | Namastasyai Namastasyai Namastasyai Namo Namaḥ | Yā Devī Sarva-Bhūteṣu Cetanetya-Bhidhīyate | Namastasyai Namastasyai Namastasyai Namo Namaḥ
नमस्ते सते सर्वलोकाश्रये
जो देवी समस्त प्राणियों में बुद्धि-रूप से विद्यमान हैं — उन्हें बारम्बार नमस्कार। जो देवी सर्वत्र चेतना कहलाती हैं — उन्हें बारम्बार नमस्कार।
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॥ श्लोक ५ ॥
निद्रा — क्षुधा — छाया रूपा
या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
Yā Devī Sarva-Bhūteṣu Nidrā-Rūpeṇa Saṃsthitā | Namastasyai Namastasyai Namastasyai Namo Namaḥ | Yā Devī Sarva-Bhūteṣu Kṣudhā-Rūpeṇa Saṃsthitā
नमस्ते सते सर्वलोकाश्रये
जो देवी सर्वत्र निद्रा-रूप में विद्यमान हैं — बारम्बार नमस्कार। जो देवी सर्वत्र क्षुधा (भूख) के रूप में हैं — बारम्बार नमस्कार।
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॥ श्लोक ६ ॥
तृष्णा — क्षान्ति — जाति रूपा
या देवी सर्वभूतेषु तृष्णारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
Yā Devī Sarva-Bhūteṣu Tṛṣṇā-Rūpeṇa Saṃsthitā | Namastasyai… | Yā Devī Sarva-Bhūteṣu Kṣānti-Rūpeṇa Saṃsthitā | Namastasyai…
नमस्ते सते सर्वलोकाश्रये
जो देवी सर्वत्र तृष्णा (प्यास/इच्छा) के रूप में हैं — नमस्कार। जो देवी सर्वत्र क्षमा-रूप में हैं — बारम्बार नमस्कार।
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॥ श्लोक ७ ॥
लज्जा — शान्ति — श्रद्धा रूपा
या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
Yā Devī Sarva-Bhūteṣu Lajjā-Rūpeṇa Saṃsthitā | Namastasyai… | Yā Devī Sarva-Bhūteṣu Śānti-Rūpeṇa Saṃsthitā | Namastasyai…
नमस्ते सते सर्वलोकाश्रये
जो देवी सर्वत्र लज्जा-रूप में विद्यमान हैं — बारम्बार नमस्कार। जो देवी सर्वत्र शान्ति-स्वरूप हैं — बारम्बार नमस्कार।
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॥ श्लोक ८ ॥
श्रद्धा — कान्ति — लक्ष्मी रूपा
या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु कान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
Yā Devī Sarva-Bhūteṣu Śraddhā-Rūpeṇa Saṃsthitā | Namastasyai… | Yā Devī Sarva-Bhūteṣu Kānti-Rūpeṇa Saṃsthitā | Namastasyai…
नमस्ते सते सर्वलोकाश्रये
जो देवी सर्वत्र श्रद्धा-रूप में हैं — नमस्कार। जो देवी सर्वत्र कान्ति (तेज) के रूप में विद्यमान हैं — बारम्बार नमस्कार।
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॥ श्लोक ९ ॥
जय देवि चामुण्डे — मंगल स्तुति
जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतापहारिणि।
जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते॥
मधुकैटभविध्वंसि विधातृवरदे नमः।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥
Jaya Tvaṃ Devi Cāmuṇḍe Jaya Bhūtāpahāriṇi | Jaya Sarvagate Devi Kālarātri Namo'stu Te | Madhu-Kaiṭabha-Vidhvaṃsi Vidhātṛ-Varade Namaḥ | Rūpaṃ Dehi Jayaṃ Dehi Yaśo Dehi Dviṣo Jahi
नमस्ते सते सर्वलोकाश्रये
हे देवी चामुण्डे — जय! हे भूत-भय-हारिणी — जय! हे सर्वव्यापी कालरात्रि — नमस्कार। हे मधु-कैटभ का विनाश करने वाली — नमस्कार! रूप दो, विजय दो, यश दो और शत्रुओं का नाश करो।
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॥ श्लोक १० ॥
सर्वस्वरूपे — महामाया प्रार्थना
सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते।
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥
एतत्ते वदनं सौम्यं लोचनत्रयभूषितम्।
पातु नः सर्वभीतिभ्यः कात्यायनि नमोऽस्तु ते॥
Sarva-Svarūpe Sarveśe Sarva-Śakti-Samanvite | Bhayebhyas-Trāhi No Devi Durge Devi Namo'stu Te | Etat-Te Vadanaṃ Saumyaṃ Locana-Traya-Bhūṣitam | Pātu Naḥ Sarva-Bhītibhyaḥ Kātyāyani Namo'stu Te
नमस्ते सते सर्वलोकाश्रये
हे सर्वस्वरूपे! हे सर्वेशी! हे सर्वशक्ति-सम्पन्ने! समस्त भयों से हमारी रक्षा करो — हे दुर्गा देवी — नमस्कार। हे कात्यायनी! आपका त्रिनेत्र-विभूषित शान्त मुख हमें सर्व भयों से बचाए — नमस्कार।
✦ महाकाली स्तोत्र फल श्रुति ✦
महाकाली स्तोत्रमिदं पठेद् भक्त्या नरो यदि।
सर्वापद्विमुक्तः स्यात् पूज्यते त्रिदशैरपि॥
या देवी भक्तिमाशाश्य दर्शनं कुरुते नृणाम्।
नाशयत्याशु दारिद्र्यं विजयं च ददाति सः॥
जो भक्त महाकाली स्तोत्र का पाठ करता है वह सम्पूर्ण आपदाओं से मुक्त होता है और देवता भी उसकी पूजा करते हैं। जो देवी भक्तों को दर्शन देती हैं वे दारिद्र्य का नाश करती हैं और विजय प्रदान करती हैं।
💀 महाकाली स्तोत्र — परिचय
यह स्तोत्र देवी महात्म्यम् (दुर्गा सप्तशती) का अंग है जो मार्कण्डेय पुराण में संकलित है। देवी महात्म्यम् के ७०० श्लोकों में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती — तीनों महाशक्तियों की स्तुति है।
"या देवी सर्वभूतेषु" — यह विश्व-प्रसिद्ध श्लोक-समूह भारतीय आध्यात्मिकता का सार है। देवी सर्वत्र हैं — शक्ति में, बुद्धि में, चेतना में, निद्रा में, क्षुधा में — हर रूप देवी का ही है।
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देवी महात्म्यम्मार्कण्डेय पुराण के ८१-९३ अध्यायों में संकलित ७०० श्लोकों का महान ग्रन्थ। नवरात्र में इसका पाठ विशेष महत्वपूर्ण है।
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महाकाली — प्रथम चरित्रदेवी महात्म्यम् के प्रथम चरित्र में महाकाली ने मधु-कैटभ राक्षसों का वध किया। यह ब्रह्माजी की स्तुति का प्रसंग है।
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या देवी सर्वभूतेषुयह अद्वैत शक्ति-उपासना का मूल सूत्र है — देवी किसी एक स्थान पर नहीं, वह सर्वत्र सर्व-रूप में विद्यमान हैं।
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नवरात्र पाठनवरात्र में देवी महात्म्यम् का पाठ नित्य किया जाता है। महाकाली स्तोत्र का पाठ महाकाली-पूजन में विशेष।