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Shiv Beej Mantra

शिव बीज मंत्र
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ॐ नमः शिवाय ✦ ✦ ✦ ॐ ह्रौं जूं सः ✦ ✦ ✦ ॐ नमो भगवते रुद्राय

बीज मंत्र — ब्रह्मांड की सूक्ष्मतम शक्ति के वाहक। प्रत्येक बीजाक्षर में एक देवता की समस्त शक्ति समाहित है। शिव के ये बीज मंत्र ध्वनि-ऊर्जा के परम रूप हैं।

तन्त्र • वेद • शैव आगम • तारक मंत्र • पंचाक्षर • महामृत्युंजय बीज
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✦ एक माला
ह्रौं
✦ शिव बीज
जूं
✦ मृत्युंजय बीज
✦ परम बीज
ॐ नमः शिवाय🌀 ॐ ह्रौं जूं सः🌀 ॐ नमो भगवते रुद्राय🌀 ह्रीं शिवाय नमः🌀 ॐ तत्पुरुषाय विद्महे🌀 नमः शंभवाय च🌀 ॐ नमः शिवाय🌀 ॐ ह्रौं जूं सः🌀 ॐ नमो भगवते रुद्राय🌀 ह्रीं शिवाय नमः🌀 ॐ तत्पुरुषाय विद्महे🌀 नमः शंभवाय च🌀
बीज मंत्र १ · पंचाक्षर
ॐ नमः शिवाय
OM NAMAḤ ŚIVĀYA
पंचाक्षर मंत्र
शिव को नमस्कार — पाँच तत्त्वों (पंचभूत) और पाँच शक्तियों का आह्वान। यह शिव का सर्वोत्कृष्ट मंत्र है जिसमें सृष्टि का सम्पूर्ण ज्ञान समाया है।
मःशिवा
पंचाक्षर
बीज मंत्र २ · महामृत्युंजय
ॐ ह्रौं जूं सः
OM HRAUṂ JŪṂ SAḤ
महामृत्युंजय बीज
ह्रौं = शिव का हृदय-बीज, जूं = मृत्युंजय-बीज, सः = प्राण-शक्ति। यह त्रिबीज मंत्र महामृत्युंजय का सार है — मृत्यु-भय और रोग-नाश के लिए परम प्रभावी।
ह्रौं जूं सः
महामृत्युंजय
बीज मंत्र ३ · शक्ति बीज
ह्रीं शिवाय नमः
HRĪṂ ŚIVĀYA NAMAḤ
शिव ह्रीं बीज
ह्रीं = माया-बीज, शक्ति का बीजाक्षर। शिव और शक्ति (पार्वती) के संयुक्त आह्वान का मंत्र — भौतिक समृद्धि, प्रेम और ऐश्वर्य के लिए विशेष प्रभावी।
ह्रींशिवा
शक्ति बीज
बीज मंत्र ४ · रुद्र
ॐ नमो भगवते रुद्राय
OM NAMO BHAGAVATE RUDRĀYA
रुद्र द्वादशाक्षर
भगवान रुद्र को साष्टांग प्रणाम। यह बारह अक्षरों का द्वादशाक्षर मंत्र है। रुद्र स्वरूप — संहारक, क्रोधी और भक्तवत्सल। दुर्घटनाओं और शत्रुओं से रक्षा।
नमो रुद्राय
रुद्र मंत्र
बीज मंत्र ५ · गायत्री
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे
महादेवाय धीमहि
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्
OM TAT PURUṢĀYA VIDMAHE
शिव गायत्री मंत्र
परम पुरुष (शिव) को जानते हैं, महादेव का ध्यान करते हैं — वह रुद्र हमें प्रेरणा दें। गायत्री छंद में शिव का आह्वान — बुद्धि और आत्मज्ञान के लिए।
तत्पुरुषाय विद्महे धीमहि
गायत्री
बीज मंत्र ६ · शतरुद्रीय
नमः शंभवाय च मयोभवाय च
नमः शंकराय च मयस्कराय च
NAMAḤ ŚAMBHAVĀYA CA MAYOBHAVĀYA CA
शतरुद्रीय — रुद्राष्टाध्यायी
यजुर्वेद के शतरुद्रीय (रुद्राष्टाध्यायी) का यह मंत्र — शंभु, मयोभव, शंकर, मयस्कर — शिव के चार मांगलिक रूपों का आह्वान। समस्त मंगल और सुख की प्राप्ति के लिए।
शंभवमयोभवशंकर
यजुर्वेद
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✦ पंचाक्षर — पाँच अक्षरों का ब्रह्मांड ✦
NA
पृथ्वी
Earth · Brahma
🌍 भूमि तत्त्व
मः MAḤ
जल
Water · Vishnu
💧 जल तत्त्व
शि ŚI
अग्नि
Fire · Rudra
🔥 अग्नि तत्त्व
वा
वायु
Air · Ishvara
🌬️ वायु तत्त्व
YA
आकाश
Ether · Sadashiva
✨ आकाश तत्त्व
ॐ नमः शिवाय — पाँचों तत्त्वों का समन्वय "न" = भूमि (ब्रह्मा), "मः" = जल (विष्णु), "शि" = अग्नि (रुद्र), "वा" = वायु (ईश्वर), "य" = आकाश (सदाशिव)। इस प्रकार पंचाक्षर में सम्पूर्ण सृष्टि — पंचभूत, पंचदेव और पंचकोश — समाहित हैं।

🌀 बीज मंत्र — ध्वनि का ब्रह्मांडीय विज्ञान

बीज मंत्र वे एकाक्षरीय या द्वि-तीन अक्षरीय ध्वनियाँ हैं जिनमें एक देव-शक्ति का सम्पूर्ण तत्त्व समाहित है। "बीज" का अर्थ है बीज — जैसे एक छोटे बीज में विशाल वृक्ष की सम्पूर्ण संभावना होती है।

तन्त्र शास्त्र के अनुसार, प्रत्येक देवता का एक विशेष ध्वनि-स्पंदन (frequency) है। जब हम वह ध्वनि उच्चारित करते हैं, तो हम उस देवता की शक्ति से जुड़ते हैं। यही बीज मंत्र का रहस्य है।

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ह्रौं — शिव का हृदय बीजह्रौं शिव के हृदय से उत्पन्न बीजाक्षर है। "ह" = शिव, "र" = प्रकृति, "औ" = त्रिलोकी शक्ति, "ं" = अनुस्वार — सर्वव्यापकता।
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जूं — मृत्युंजय का बीजजूं बीज मृत्युंजय मंत्र का सार है। यह अमृत की ध्वनि है जो मृत्यु के भय को नष्ट करती है और जीवन-शक्ति का संचार करती है।
ह्रीं — माया का बीजह्रीं माया-बीज है जो शिव-शक्ति (अर्धनारीश्वर) के संयुक्त तत्त्व को व्यक्त करता है। यह लक्ष्मी और भुवनेश्वरी का भी बीज है।
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आधुनिक विज्ञाननाद योग के अनुसार, बीज मंत्रों की ध्वनि-तरंगें मस्तिष्क के विशेष भागों को सक्रिय करती हैं। "ॐ" के उच्चारण से vagus nerve stimulate होती है जो चिंता और तनाव कम करती है।
🌀 भक्तों के विचार

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SHIV BEEJ MANTRA
ॐ नमः शिवाय • ह्रौं जूं सः