✦ ऋग्वेद • मंडल ७ • सूक्त ५९ • ऋषि वसिष्ठ ✦

Mahamrityunjaya Mantra

महामृत्युंजय मंत्र
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ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

मृत्यु को जीतने वाले महामंत्र — तीन नेत्रों वाले रुद्र को आह्वान, जो हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त कर अमृत की ओर ले जाते हैं।

ऋग्वेद • मंडल ७ • सूक्त ५९ • ऋषि वसिष्ठ • मृत्यु-नाशक महामंत्र
११
✦ न्यूनतम जप
१०८
✦ एक माला
१२५०००
✦ पुरश्चरण
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॐ नमः शिवाय हर हर महादेव ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॐ नमः शिवाय हर हर महादेव
✦ महामृत्युंजय मंत्र — सम्पूर्ण विवेचन ✦
॥ महामंत्र ॥
सम्पूर्ण मंत्र — मूल पाठ
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे
सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्
मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
Oṃ Tryambakaṃ Yajāmahe | Sugandhiṃ Puṣṭivardhanam | Urvārukamiva Bandhanān | Mṛtyormukṣīya Māmṛtāt
☽ शब्द-विच्छेद ☽
OM
परब्रह्म का प्रतीक — सृष्टि का आदि नाद
त्र्यम्बकम्
TRYAMBAKAM
तीन नेत्रों वाले — सूर्य, चंद्र और अग्नि
यजामहे
YAJĀMAHE
हम पूजा करते हैं, यजन करते हैं
सुगन्धिम्
SUGANDHIM
सुगंध से युक्त — आत्मा की सुगंध
पुष्टिवर्धनम्
PUṢṬIVARDHANAM
पोषण बढ़ाने वाले — जीवन-शक्ति के वर्धक
उर्वारुकमिव
URVĀRUKAMIVA
जैसे पका खीरा — स्वाभाविक रूप से
बन्धनात्
BANDHANĀT
बंधन से, मृत्यु की रस्सी से
मृत्योः
MṚTYOḤ
मृत्यु से — मृत्यु के जाल से
मुक्षीय
MUKṢĪYA
मुक्त करें हमें — मोक्ष दें
माऽमृतात्
MĀ-AMṚTĀT
अमृत से नहीं — अमरत्व की ओर ले जाएँ
✦ सम्पूर्ण अर्थ ✦
हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो दिव्य सुगंध से युक्त हैं और हमारे जीवन का पोषण करते हैं। जैसे पका हुआ खीरा अपने वृन्त (डंठल) से स्वाभाविक रूप से अलग हो जाता है — उसी प्रकार हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें, परंतु अमृत (मोक्ष) से नहीं।
~ ☽ ~
☽ जप विधि — Jap Vidhi ☽
११
🌙
लघु जप
११ बार
नित्य संकट में या बीमारी के समय — प्रातः स्नान के बाद शांत मन से ११ बार जप करें।
१०८
📿
एक माला
१०८ बार
रुद्राक्ष माला से १०८ बार जप करें। यह संख्या सर्वोत्तम है — नित्य अभ्यास के लिए।
१०००
🔱
सहस्र जप
१००० बार
गंभीर रोग, दुर्घटना-भय या मृत्युभय के समय — ११ दिन प्रतिदिन १००० बार जप करें।
१२५०००
पुरश्चरण
१,२५,००० बार
महामृत्युंजय अनुष्ठान — ४० दिन में प्रतिदिन ~३१२५ जप। सिद्धि के लिए गुरु की आवश्यकता।
☽ जप के नियम ☽
🌅
समयब्रह्म-मुहूर्त (प्रातः ४-६ बजे) सर्वश्रेष्ठ। सोमवार और महाशिवरात्रि पर विशेष फलदायी।
🛁
शुद्धतास्नान के बाद, स्वच्छ वस्त्र पहनकर, पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें।
📿
मालारुद्राक्ष माला सर्वश्रेष्ठ है। माला को दाहिने हाथ में, मध्यमा और अँगूठे से पकड़ें। तर्जनी का स्पर्श न करें।
🧘
आसनकुशासन या ऊनी आसन पर बैठें। सुखासन या पद्मासन में। रीढ़ सीधी रखें।
🤫
उच्चारणमानसिक जप (मन में) सबसे शक्तिशाली। उपांशु (होठ हिलाएँ पर आवाज़ न हो) मध्यम। वाचिक (मुखर) सबसे कम।
💧
अभिषेकजल के साथ जप करें — शिवलिंग पर जल चढ़ाते हुए प्रत्येक जप पर एक लोटा जल का संकल्प करें।
🚫
वर्जनीयजप के समय बात न करें। भोजन के तुरंत बाद न करें। मांसाहार और मदिरा त्यागें।
🌿
अनुष्ठान मेंघी का दीप, बेल-पत्र, गंगाजल, और धतूरा के फूल रखें। धूप-अगरबत्ती जलाएँ।
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✦ मंत्र की उत्पत्ति — Mantra Origin ✦
ऋग्वेद • मंडल ७ • सूक्त ५९ • मंत्र १२
ऋषि वसिष्ठ • देवता मृत्युंजय रुद्र • छंद अनुष्टुप
यह मंत्र ऋग्वेद के सप्तम मंडल में ऋषि वसिष्ठ द्वारा दृष्ट (देखा गया) है। पुराणों में इसे मार्कण्डेय ऋषि का मंत्र भी कहा जाता है — जिन्होंने इस मंत्र के जप से यमराज को जीतकर अमरत्व प्राप्त किया।

☽ महामृत्युंजय — मृत्यु को जीतने वाले

"महामृत्युंजय" का अर्थ है — महान मृत्यु-विजेता। यह शिव का वह रूप है जिसने स्वयं मृत्यु (यम) को परास्त किया। मार्कण्डेय पुराण में वर्णन है कि बालक मार्कण्डेय ने इस मंत्र के जप से यमदूतों को भगाया और अल्पायु के श्राप से मुक्ति पाई।

खीरे का उपमान इस मंत्र का सबसे गहरा रहस्य है — जैसे पका खीरा बेल से स्वाभाविक रूप से अलग होता है, वैसे ही मोक्ष भी जबरदस्ती नहीं, बल्कि परिपक्वता से मिलता है। मंत्र मृत्यु को नकारता नहीं — बल्कि उसे अमृत में रूपांतरित करने की प्रार्थना करता है।

मार्कण्डेय की कथामहर्षि मृकण्डु के पुत्र मार्कण्डेय को मात्र १६ वर्ष की आयु दी गई थी। शिव-भक्ति और इस मंत्र के जप से उन्होंने यम को परास्त किया और चिरंजीवी हुए।
🔱
त्र्यम्बक का अर्थत्र्यम्बक = तीन नेत्र — सूर्य (भूत), चंद्र (वर्तमान), और अग्नि (भविष्य)। शिव के तीनों नेत्र तीनों कालों में व्याप्त हैं।
💊
आयुर्वेद में महत्वमहामृत्युंजय मंत्र को "महा-संजीवनी मंत्र" भी कहते हैं। गंभीर रोगों में, शल्य-चिकित्सा से पूर्व, और प्रसव के समय इसका विशेष पाठ किया जाता है।
🌊
जल से जप का महत्वजल के साथ महामृत्युंजय मंत्र जपने से वह जल "मृत्युंजय जल" बन जाता है। रोगी को यह जल पिलाने से लाभ होता है — यह परंपरा आज भी प्रचलित है।
☽ भक्तों के विचार

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MAHAMRITYUNJAYA
मृत्यु-नाशक महामंत्र