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✦ आदि शंकराचार्य विरचितम् ✦

Bilvashtakam

बिल्वाष्टकम्
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बेल-पत्र की अष्ट-रूपी महिमा का वर्णन — तीन पत्तियों में ब्रह्मा, विष्णु और शिव का वास, प्रत्येक पत्र शिव को अर्पित करने से मिलता है पुण्य।

रचयिता : आदि शंकराचार्य • ८ श्लोक + फलश्रुति
एकबिल्वं शिवार्पणम्
त्रिदलं त्रिगुणाकारं🍃 त्रिनेत्रं च त्रयायुधम्🍃 एकबिल्वं शिवार्पणम्🍃 त्रिजन्मपापसंहारम्🍃 दर्शनं बिल्वपत्रस्य🍃 स्पर्शनं पापनाशनम्🍃 त्रिदलं त्रिगुणाकारं🍃 त्रिनेत्रं च त्रयायुधम्🍃 एकबिल्वं शिवार्पणम्🍃 त्रिजन्मपापसंहारम्🍃 दर्शनं बिल्वपत्रस्य🍃 स्पर्शनं पापनाशनम्🍃
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✦ बिल्वाष्टकम् — सम्पूर्ण ८ श्लोक ✦
॥ श्लोक १ ॥
त्रिगुण, त्रिनेत्र, त्रायुध का प्रतीक
त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रयायुधम्।
त्रिजन्मपापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम्॥
Tridalaṃ Triguṇākāraṃ Trinetraṃ ca Trayāyudham | Trijanma-Pāpa-Saṃhāraṃ Eka-Bilvaṃ Śivārpaṇam
एकबिल्वं शिवार्पणम्
तीन दलों (पत्तियों) वाला, तीन गुणों (सत्व, रज, तम) के रूप वाला, तीन नेत्रों और तीन आयुधों का प्रतीक — ऐसा एक बेल-पत्र शिव को अर्पण करने से तीन जन्मों के पाप नष्ट होते हैं।
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॥ श्लोक २ ॥
बेल-पत्र के दर्शन मात्र से पाप-नाश
त्रिशाखैः बिल्वपत्रैश्च ह्यच्छिद्रैः कोमलैः शुभैः।
तव पूजां करिष्यामि प्रसीद परमेश्वर॥
Triśākhaiḥ Bilvapatraiś-ca Hyacchidraih Komalaiḥ Śubhaiḥ | Tava Pūjāṃ Kariṣyāmi Prasīda Parameśvara
एकबिल्वं शिवार्पणम्
हे परमेश्वर! तीन शाखाओं वाले, छिद्र-रहित, कोमल और शुभ बेल-पत्रों से मैं आपकी पूजा करूँगा — कृपा करें और प्रसन्न हों।
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॥ श्लोक ३ ॥
कोटि तीर्थों के समान पुण्य
दर्शनं बिल्वपत्रस्य स्पर्शनं पापनाशनम्।
अघोरपापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम्॥
Darśanaṃ Bilvapatrasya Sparśanaṃ Pāpanāśanam | Aghora-Pāpa-Saṃhāraṃ Eka-Bilvaṃ Śivārpaṇam
एकबिल्वं शिवार्पणम्
बेल-पत्र के दर्शन मात्र से पुण्य मिलता है, उसके स्पर्श से पाप नष्ट होते हैं — और एक बेल-पत्र शिव को अर्पित करने से घोरतम पाप भी समाप्त हो जाते हैं।
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॥ श्लोक ४ ॥
काशी-यात्रा के समान फल
शिवपूजाविहीनस्य वृथा जन्म गतं भुवि।
शिवपूजा समायुक्तं एकबिल्वं शिवार्पणम्॥
Śiva-Pūjā-Vihīnasya Vṛthā Janma Gataṃ Bhuvi | Śiva-Pūjā Samāyuktaṃ Eka-Bilvaṃ Śivārpaṇam
एकबिल्वं शिवार्पणम्
जिसने शिव की पूजा नहीं की, उसका इस पृथ्वी पर जन्म व्यर्थ गया — शिव-पूजा में संलग्न होकर एक बेल-पत्र अर्पित करें।
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॥ श्लोक ५ ॥
राम-नाम के समान फल
रामलिंगे प्रतिष्ठितं स्वर्णकल्पं च यत्फलम्।
शिवलिंगे त्वर्पितं च एकबिल्वं शिवार्पणम्॥
Rāma-Liṅge Pratiṣṭhitaṃ Svarṇa-Kalpaṃ ca Yat-Phalam | Śiva-Liṅge Tvarṇitaṃ ca Eka-Bilvaṃ Śivārpaṇam
एकबिल्वं शिवार्पणम्
राम-लिंग में जो सुवर्ण अर्पण का फल है — वही फल शिवलिंग पर एक बेल-पत्र अर्पित करने से मिलता है।
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॥ श्लोक ६ ॥
अश्वमेध यज्ञ से भी बड़ा फल
अखण्डबिल्वपत्रेण पूजिते नन्दिकेश्वरे।
शुद्ध्यन्ति सर्वपापेभ्यो एकबिल्वं शिवार्पणम्॥
Akhaṇḍa-Bilva-Patreṇa Pūjite Nandike-Śvare | Śuddhyanti Sarva-Pāpebhyo Eka-Bilvaṃ Śivārpaṇam
एकबिल्वं शिवार्पणम्
अखण्ड (न टूटे) बेल-पत्र से नन्दिकेश्वर (शिव) की पूजा करने पर समस्त पापों से शुद्धि हो जाती है — एक बेल-पत्र शिव को अर्पण करें।
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॥ श्लोक ७ ॥
काशी में बेल-पत्र अर्पण का महत्व
सालग्रामशिलामेका विप्राणां जातिरुच्यते।
बिल्वपत्रे च शिवपूजा एकबिल्वं शिवार्पणम्॥
Sālagrāma-Śilā-Mekā Viprāṇāṃ Jātirucyate | Bilva-Patre ca Śiva-Pūjā Eka-Bilvaṃ Śivārpaṇam
एकबिल्वं शिवार्पणम्
जैसे शालग्राम शिला ब्राह्मणों की कुल-परंपरा का प्रतीक है — वैसे ही बेल-पत्र से शिव-पूजा सर्वश्रेष्ठ है। एक बेल-पत्र शिव को अर्पण करें।
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॥ श्लोक ८ ॥
मोक्ष और शिवलोक की प्राप्ति
कूष्माण्डं सुमहाफलं शिवार्पणं न देयम्।
बिल्वार्पणे महापुण्यं एकबिल्वं शिवार्पणम्॥
Kūṣmāṇḍaṃ Su-Mahā-Phalaṃ Śivārpaṇaṃ na Deyam | Bilva-Arpaṇe Mahā-Puṇyaṃ Eka-Bilvaṃ Śivārpaṇam
एकबिल्वं शिवार्पणम्
कुम्हड़े (कूष्माण्ड) का बड़ा फल शिव को अर्पण न करें — बेल-पत्र का अर्पण ही महापुण्य है। एक बेल-पत्र शिव को अर्पण करें।
✦ फलश्रुति — Phala Shruti ✦
बिल्वाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् शिवसन्निधौ।
सर्वपापविनिर्मुक्तः शिवलोकमवाप्नुयात्॥
Bilvāṣṭakam-idaṃ puṇyaṃ yaḥ paṭhet Śiva-sannidhau | Sarva-Pāpa-Vinirmuktaḥ Śiva-Lokam-avāpnuyāt
जो कोई इस पवित्र बिल्वाष्टकम् का पाठ शिव की उपस्थिति में करता है — वह समस्त पापों से मुक्त होकर शिवलोक को प्राप्त करता है।

🍃 बिल्वाष्टकम् — बेल-पत्र की महिमा

बिल्वाष्टकम् की रचना आदि शंकराचार्य ने की है। इसमें आठ श्लोकों में बेल-पत्र (बिल्व) की महिमा का वर्णन है। बेल-पत्र की तीन पत्तियाँ त्रिमूर्ति — ब्रह्मा, विष्णु और महेश — का प्रतीक हैं। साथ ही ये तीन गुणों और शिव के तीन नेत्रों का भी प्रतिनिधित्व करती हैं।

प्रत्येक श्लोक "एकबिल्वं शिवार्पणम्" की पवित्र ध्रुवपंक्ति से समाप्त होता है। यह स्तोत्र शिव-पूजा के समय बेल-पत्र अर्पित करते हुए गाया जाता है और श्रावण मास में इसका विशेष महत्व है।

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त्रिगुण प्रतीकबेल-पत्र की तीन पत्तियाँ सत्व, रज और तम — तीन गुणों का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो शिव को प्रिय हैं।
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त्रिनेत्र का प्रतीकबेल-पत्र की तीन पत्तियाँ शिव के तीन नेत्रों — सूर्य, चंद्र और अग्नि — का प्रतीक हैं।
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औषधीय गुणबेल-वृक्ष आयुर्वेद में अत्यंत महत्वपूर्ण है — इसके पत्ते, फल और छाल सभी औषधीय हैं।
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सोमवार का महत्वसोमवार को बेल-पत्र से शिव-पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है और मनोकामना पूर्ण होती है।
BILVASHTAKAM
8 Stanzas • Adi Shankaracharya