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✦ बर अजगुत देखल तोर अंगना — सम्पूर्ण गीत ✦
॥ विद्यापति गीत ॥
मूल पाठ — मैथिली में
गौरा तोर अंगना !
बर अजगुत देखल तोर अंगना,
एक दिस बाघ सिंह करे हुलना,
दोसर बरद छैन्ह सेहो बौना,
हे गौरा तोर अंगना !
पैंच उधार माँगे गेलौं अंगना,
सम्पति मध्य देखल भांग घोटना.
हे गौरा तोर अंगना !
खेती न पथारि शिव गुजर कोना ,
मंगनी के आस छैन्ह बरसों दिना,
हे गौरा तोर अंगना !
कार्तिक गणपति दुई चेंगना,
एक चढथि मोर एक मुसना,
हे गौर तोर .....
भनहि विद्यापति सुनु उगना,
दरिद्र हरण करू धइल सरना !
Bar Ajgut Dekhal Tor Angana...
☽ भावार्थ एवं शब्दार्थ ☽
बर अजगुत
BAR AJGUT
अद्भुत दृश्य
देखल तोर अंगना
DEKHAL TOR ANGANA
देखा तुम्हारा अंगना
बाघ सिंह
BĀGH SINGH
बाघ और सिंह
बरद छैन्ह
BARAD CHHAINH
बादल हैं
सेहो बौना
SEHO BAUNA
वह भी बौना
दरिद्र हरण
DARIDRA HARAN
दरिद्रता हरण
✦ सम्पूर्ण अर्थ (मैथिली + हिंदी) ✦
हे गौरी! तुम्हारे अंगना में अद्भुत दृश्य देखा। एक ओर बाघ और सिंह खेल रहे हैं, दूसरी ओर बादल हैं जो बौने हैं। पाँच उधार माँगकर गया अंगना, संपत्ति में भांग घोट रहा। खेती नहीं बोई, शिव गुजर गया। मंगनी की आस में बरसों बीते। कार्तिक गणपति दो चेंगने, एक पर मोर चढ़ा, एक पर मुसा। विद्यापति कहते हैं — सुनो उगना, दरिद्र हरण करो धईल सरना!
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☽ गीत की महिमा एवं प्रसंग ☽
☽ विद्यापति के नचारी गीत
यह गीत महाकवि विद्यापति की नचारी गीत श्रेणी का हिस्सा है, जिसमें गौरी के अंगना का अद्भुत वर्णन है। शिव के विभिन्न रूपों का प्रतीकात्मक चित्रण।
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नचारी गीतअंगना के दृश्यों से भरे गीत, मैथिली संस्कृति के रत्न।
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शिव रूपबाघ, सिंह, बादल — शिव के विभिन्न अवतारों का बोध।
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लोकप्रियतामैथिली समारोहों में गाया जाता है।