ShivMarg
देवी-देवताओं के पवित्र मंत्र, भजन और आरती — एक ही स्थान पर। आस्था की राह पर चलें।






विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपम्॥

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥


महालक्ष्म्यै नमः॥

जय जय राम॥

जय कपीस तिहु लोक उजागर॥

या शुभ्र वस्त्रावृता॥

वासुदेवाय॥

महाकाल्यै नमः॥

सूर्याय नमः॥

चंद्रस्य चंद्रायते नमोऽस्तु ते

भर्गो देवस्य धीमहि॥

षण्मुखाय नमः॥

सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्॥

भूतभव्यभवत्प्रभुः॥
मैथिली
भए प्रीति मोरा॥
शिव भजन
जय शम्भो नीलकंठ देव॥
हमारे साथ रहें
ShivMarg की शुरुआत एक सरल विचार से हुई — हिंदू धर्म के मंत्र, स्तोत्र, आरती और भजन एक ऐसी जगह मिलें जहाँ शुद्ध पाठ, सही उच्चारण और स्पष्ट अर्थ एक साथ उपलब्ध हों। बहुत बार लोग किसी मंत्र का अर्थ जानने के लिए कई वेबसाइट खंगालते हैं; ShivMarg इस भटकाव को खत्म करने के लिए बनाया गया है।
हमारा उद्देश्य — भगवान शिव, विष्णु, दुर्गा, कृष्ण, हनुमान, गणेश सहित सभी प्रमुख देवी-देवताओं के मंत्रों को उनके मूल संस्कृत रूप, हिंदी अर्थ और उपयोग की विधि के साथ प्रस्तुत करना। साथ ही मिथिला की समृद्ध मैथिली भक्ति परंपरा — विद्यापति गीत और मैथिली भजनों — को व्यापक पाठकों तक पहुँचाना।
आपको यहाँ क्या मिलेगा — 800+ मंत्र और स्तोत्र, दैनिक पंचांग, पर्व कैलेंडर, जप ट्रैकर, और नियमित रूप से प्रकाशित होने वाले शोधपरक लेख। हर पाठ के साथ संदर्भ (पुराण, वेद, उपनिषद) और सरल भाषा में अर्थ दिया जाता है ताकि नए भक्त भी बिना असमंजस के अभ्यास शुरू कर सकें।
विश्वसनीयता क्यों — प्रत्येक मंत्र को प्रकाशन से पहले मूल शास्त्रों से मिलाया जाता है, और हमारी टीम अनुवाद व उच्चारण की समीक्षा करती है। ShivMarg किसी एक व्यक्ति की राय नहीं बल्कि सदियों पुरानी परंपरा और शास्त्रों पर आधारित मंच है — विस्तार से हमारी संपादकीय नीति पढ़ें।
संस्कृत में "मंत्र" शब्द दो जड़ों से बना है — "मन्" (मन) और "त्र" (मुक्ति या रक्षा)। शाब्दिक अर्थ है "वह ध्वनि जो मन को मुक्त करे।" मंत्र जप केवल शब्दों की पुनरावृत्ति नहीं, बल्कि एक ध्वनि-अनुशासन है जो हज़ारों वर्षों के अनुभव पर आधारित है।
एकाग्रता — बार-बार एक ही ध्वनि दोहराने से मन की चंचलता कम होती है और ध्यान की नींव तैयार होती है। यही कारण है कि जप को ध्यान से पहले का अभ्यास माना जाता है।
कंपन और भाव — प्रत्येक बीज मंत्र (जैसे ॐ, ह्रीं, क्लीं) की एक विशिष्ट ध्वनि-आवृत्ति होती है। पारंपरिक मान्यता है कि शुद्ध उच्चारण से शरीर और मन में सकारात्मक कंपन उत्पन्न होते हैं — इसीलिए ShivMarg हर मंत्र के साथ सही उच्चारण देने का प्रयास करता है।
नियमितता का महत्व — एक बार का जप नहीं, बल्कि निरंतरता फल देती है। इसी वजह से हमारा 21-दिवसीय जप ट्रैकर बनाया गया है — छोटे, प्राप्त करने योग्य लक्ष्यों के माध्यम से आदत बनाने के लिए।
अंततः, मंत्र जप श्रद्धा और अनुशासन का संगम है। ShivMarg का प्रयास है कि यह अभ्यास हर व्यक्ति के लिए सुलभ, सही और सार्थक बने — चाहे वह पहली बार जप कर रहा हो या वर्षों से अभ्यासरत हो।
स्रोत — प्रत्येक मंत्र और स्तोत्र शिव पुराण, स्कंद पुराण, वेद, उपनिषद और मान्य पंचांग ग्रंथों से लिया जाता है।
समीक्षा प्रक्रिया — प्रकाशन से पूर्व प्रत्येक पाठ की संस्कृत वर्तनी और मात्राओं की जाँच की जाती है।
अनुवाद नीति — अर्थ का अनुवाद शब्दशः के बजाय भावार्थ पर केंद्रित होता है, ताकि मूल भाव सही ढंग से पहुँचे।
सावन शिवरात्रि
शिव के पावन मंत्र जपें