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✦ विद्यापति पदावली • शिव-पार्वती लीलागीत ✦

Gauri Dauri Dauri Kahthin He

गौरी दौरी दौरी कहथिन हे
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गौरी दौरी दौरी कहथिन हे
नाथ हम नहि जाब

विद्यापति के अमर गीत में गौरी की दौड़ और शिव की प्रेमलीला का सुंदर चित्रण। गौरी दौड़ती हुई कहती है — हे नाथ, हम नहीं जाएंगे। भावभीनी मैथिली कविता।

रचनाकार: महाकवि विद्यापति • १४वीं शताब्दी • मैथिली कविता
श्रवण
✦ मन को शांति
भाव
✦ शिव-शक्ति मिलन
रस
✦ संगीतमयी भक्ति
गौरी दौरी दौरी कहथिन हेनाथ हम नहि जाबभनहि विद्यापति
✦ गौरी दौरी दौरी कहथिन हे — सम्पूर्ण गीत ✦
॥ विद्यापति गीत ॥
मूल पाठ — मैथिली में
गौरी दौरी दौरी कहथिन हे
नाथ हम नहि जाब - 2
गौरी दौरी दौरी कहथिन हे
नाथ हम नहि जाब

[गीत का पूरा पाठ यहाँ जोड़ें — विद्यापति की अन्य रचनाओं के आधार पर]

भनहि विद्यापति
Gauri Dauri Dauri Kahthin He, Nath Ham Nahi Jab...
☽ भावार्थ एवं शब्दार्थ ☽
गौरी
GAURĪ
पार्वती देवी
दौरी दौरी
DAURĪ DAURĪ
दौड़ती हुई
कहथिन हे
KAHTHIN HE
कहती है हे
नाथ
NĀTH
स्वामी, प्रभु
हम नहि जाब
HAM NAHĪ JĀB
हम नहीं जाएंगे
✦ सम्पूर्ण अर्थ (मैथिली + हिंदी) ✦
गौरी दौड़ती हुई कहती है — हे नाथ, हम नहीं जाएंगे। यह विद्यापति की रचना में शिव-पार्वती की प्रेमलीला का एक अंग है, जहाँ गौरी की दौड़ और शिव की प्रतीक्षा का चित्रण है। विद्यापति कहते हैं कि यह कर्मबद्ध है।
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☽ गीत की महिमा एवं प्रसंग ☽

☽ विद्यापति के नचारी गीत

यह गीत महाकवि विद्यापति की नचारी गीत श्रेणी का हिस्सा है, जिसमें गौरी की दौड़ का वर्णन है। शिव-पार्वती के मिलन की कथा में यह एक महत्वपूर्ण पद है।

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नचारी गीतदौड़ने की लीला से भरे गीत, मैथिली संस्कृति के अनमोल रत्न।
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शिव का रहस्यगौरी की दौड़ शिव की ओर है, जो प्रेम की गति को दर्शाती है।
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लोकप्रियतामैथिली समारोहों में गाया जाता है।