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✦ श्री हनुमान — शक्तिशाली रक्षा स्तोत्र ✦

Bajrang Baan

॥ बजरंग बाण ॥
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बजरंग बाण अत्यन्त शक्तिशाली हनुमान स्तोत्र है। इसे सच्चे प्रेम और श्रद्धा से पढ़ना चाहिए। यह स्तोत्र संकट-नाशक, भूत-बाधा-निवारक और सर्वकार्य-सिद्धिकारक है।

⚠️ यह बाण केवल आस्था एवं शुद्ध मन से पढ़ें। बिना कारण या दुर्भावना से न पढ़ें।
निश्चय प्रेम प्रतीति ते विनय करें सनमान🏹 तेहि के कारज सकल शुभ सिद्ध करें हनुमान🏹 जय हनुमंत संत हितकारी🏹 सुन लीजे प्रभु अरज हमारी🏹 जन के काज विलम्ब न कीजे🏹 आतुर दौरि महा सुख दीजे🏹 निश्चय प्रेम प्रतीति ते विनय करें सनमान🏹 तेहि के कारज सकल शुभ सिद्ध करें हनुमान🏹 जय हनुमंत संत हितकारी🏹 सुन लीजे प्रभु अरज हमारी🏹
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✦ बजरंग बाण — सम्पूर्ण पाठ ✦
✦ दोहा (मंगलाचरण) ✦
निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करें सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करें हनुमान॥
जो सच्चे प्रेम, श्रद्धा और विश्वास के साथ विनम्रतापूर्वक हनुमानजी की वन्दना करते हैं, हनुमानजी उनके सभी शुभ कार्य सिद्ध कर देते हैं।
✦ चौपाई ✦
॥ १ ॥
जय हनुमंत संत हितकारी।
सुन लीजे प्रभु अरज हमारी॥
हे संतों के हितैषी हनुमानजी! आपकी जय हो। हे प्रभु! हमारी विनती सुन लीजिए।
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॥ २ ॥
जन के काज विलम्ब न कीजे।
आतुर दौरि महा सुख दीजे॥
अपने भक्तों के कार्य में देरी न करें। शीघ्र दौड़कर आएँ और महान सुख प्रदान करें।
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॥ ३ ॥
जैसे कूदि सिन्धु महि पारा।
सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥
जैसे आपने समुद्र को पार किया और सुरसा के मुख में प्रवेश करके बड़ा रूप धारण किया।
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॥ ४ ॥
आगे जाय लंकिनी रोका।
मारेहु लात गई सुर लोका॥
आगे जाने पर लंकिनी ने रोका तो आपने उसे लात मारी और वह स्वर्गलोक सिधार गई।
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॥ ५ ॥
जाय विभीषन को सुख दीन्हा।
सीता निरखि परम पद लीन्हा॥
विभीषण को सुख दिया, सीताजी के दर्शन किए और परम पद प्राप्त किया।
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॥ ६ ॥
बाग उजारि सिन्धु महँ बोरा।
अति आतुर यम कातर तोरा॥
अशोक वाटिका उजाड़ी, समुद्र में समा गए। अत्यन्त आतुर होकर यमराज की बेड़ियाँ तोड़ीं।
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॥ ७ ॥
अक्षय कुमार मारि संहारा।
लूम लपेटि लंक को जारा॥
अक्षयकुमार को मारकर संहार किया। पूँछ को आग लगाकर लंका को जला दिया।
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॥ ८ ॥
लाह लगाय लंका दुख दीन्हा।
जनकसुता दुख दूर सब कीन्हा॥
लंका को अग्नि से दुःख दिया और जनकसुता सीताजी के सभी दुःख दूर किए।
✦ बाण (आह्वान) ✦
॥ ९ ॥
यह सब करि तुम चले गँवाई।
कहाँ अब सहाय कहाँ जाई॥
जो हनुमान का ध्यान जो धरई।
सब बाधा पल में हर लेई॥
यह सब करके आप चले गए। अब कहाँ जाएँ, कौन सहायता करे? जो हनुमानजी का ध्यान करता है, उसकी सभी बाधाएँ पल भर में दूर हो जाती हैं।
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॥ १० ॥
मन में ध्यान धरो हनुमाना।
पल में दौरे आओ भगवाना।
हनुमान अंजनी के नंदन।
बाधा हरो करो जन के मंगल॥
मन में हनुमानजी का ध्यान करो — भगवान पल भर में दौड़े आएँगे। हे अंजनी-नंदन हनुमान! बाधाएँ हरें और भक्तों का कल्याण करें।
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॥ ११ ॥
ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्।
बाधा विनाशाय स्वाहा॥
हे रुद्र-स्वरूप हनुमान! सभी बाधाओं का विनाश हो।
✦ विस्तृत बाण-स्तुति ✦
॥ १२ ॥
उठु उठु चलु तोहि राम दुहाई।
पायँ परौं कर जोरि मनाई।
यौं हनुमान अखाड़े आई।
अब न टरौं बिनु काज कराई॥
उठो, उठो, चलो — आपको राम की दुहाई! पाँव पड़कर हाथ जोड़कर मनाता हूँ। हे हनुमान! अब मैं अखाड़े में आ गया हूँ और बिना काम किए यहाँ से नहीं जाऊँगा।
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॥ १३ ॥
पान सुपारी आरती गाऊँ।
बहुत विनय करि मन में लाऊँ।
कहो हनुमान कहाँ हो स्वामी।
तुम बिन मो को दूजो नाहीं॥
पान-सुपारी और आरती से पूजा करता हूँ, बहुत विनती करता हूँ। हे स्वामी हनुमान! कहाँ हो? आपके बिना मेरा और कोई नहीं।
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॥ १४ ॥
तनिक विलम्ब न करो हनुमाना।
काज करो सुनि बिनती जाना।
हाथ जोड़ि अरदास करें हम।
पूरन होय हमारे सब काम॥
हे हनुमानजी! जरा भी विलम्ब न करें। मेरी विनती सुनकर काम कीजिए। हाथ जोड़कर अरदास करता हूँ — मेरे सभी काम पूरे हों।
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॥ १५ ॥
बज्र देह पवन के नंदा।
अंधकार भज जहाँ पड़े फंदा।
संकट नाशन नाम तिहारे।
अष्ट सिद्धि नव निधि के दातारे॥
हे वज्र-देह पवन-नन्दन! जहाँ अन्धकार और फन्दे हों, वहाँ से भागो। आपका नाम संकट-नाशक है। आप आठ सिद्धियों और नौ निधियों के दाता हैं।
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॥ १६ ॥
भूत प्रेत पिशाच निशाचर।
अग्नि बेताल काल मारी मर।
इन्हें मारु तोहि सपथ राम की।
राखु नाथ मर्याद नाम की॥
भूत, प्रेत, पिशाच, निशाचर, अग्नि-बेताल, काल और महामारी — इन सबको मारो। आपको राम की सौगन्ध है। हे नाथ! अपने नाम की मर्यादा रखें।
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॥ १७ ॥
जनक सुता हरि दास कहावो।
ताकी सपथ विलम्ब न लावो।
जो हनुमान का बाण चलावे।
ताके सकल दुःख दूर हो जावें॥
जनकसुता के दास कहलाते हो — उनकी सौगन्ध लेकर विलम्ब न करें। जो बजरंग बाण का पाठ करता है, उसके सभी दुःख दूर हो जाते हैं।
✦ फल-दोहा ✦
यह बजरंग-बाण जेहि मारे।
ताहि न कोउ काल कर पारे।
पाठ करे बजरंग-बाण की।
हनुमत रक्षा करें प्रान की॥
जिसे यह बजरंग बाण मार दे, उसे कोई काल भी पार नहीं कर सकता। जो बजरंग बाण का पाठ करता है, हनुमानजी उसके प्राणों की रक्षा करते हैं।
॥ फल-श्रुति ॥
प्रेम सहित जो जन पाठ करें।
सब बाधाएँ नाश करें हरें।
महाबीर हनुमान की सेवा।
जो करे तासों क्या हो खेवा॥
जो प्रेम सहित इस बाण का पाठ करते हैं, उनकी सभी बाधाएँ नष्ट हो जाती हैं। जो महावीर हनुमानजी की सेवा करता है, उसे किस बात की चिन्ता।