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✦ सम्पूर्ण काली आरती ✦

Kali Maa Aarti

काली माँ आरती
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माँ काली की सम्पूर्ण आरती — सायंकाल दीप जलाकर और प्रातःकाल भी गाई जाने वाली जय काली माँ की महान आरती। अर्थ सहित सम्पूर्ण पाठ।

सम्पूर्ण आरती • ८ पद • काली पूजन • प्रातः-सायं
जय काली माँ जय काली माँ ॥ जय श्याम काली महाकाली माँ
जय काली माँ जय काली माँ🔥 जय श्याम काली महाकाली माँ🔥 जय जय महाकाली नमो नमः🔥 ॐ क्रीं कालिकायै नमः🔥 दीप जलाओ माँ को मनाओ🔥 जय काली माँ जय काली माँ🔥 जय श्याम काली महाकाली माँ🔥 जय जय महाकाली नमो नमः🔥 ॐ क्रीं कालिकायै नमः🔥 दीप जलाओ माँ को मनाओ🔥
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✦ काली माँ आरती — सम्पूर्ण ✦
ॐ जय काली माँ जय काली माँ।
जय श्याम काली महाकाली माँ॥
ॐ जय काली माँ॥
जय काली माँ जय काली माँ।
जय श्याम काली महाकाली माँ।
ॐ जय काली माँ॥
॥ आरती — प्रथम पद ॥
नील वरण तव तन शोभित माँ।
मुण्डमाल गल सोहत माँ।
चार भुजा में शस्त्र धारे माँ।
भक्त जनों के दुख हरे माँ॥
नीले वर्ण का तन सुशोभित है, गले में मुण्डमाला सोहती है, चारों भुजाओं में शस्त्र धारण किए हैं — भक्तों के दुख हरने वाली माँ।
जय काली माँ जय काली माँ।
जय श्याम काली महाकाली माँ।
ॐ जय काली माँ॥
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॥ आरती — द्वितीय पद ॥
शव के ऊपर खड़ी महारानी माँ।
लाल जिह्वा वाली भवानी माँ।
घोर अट्टहास से धरा कँपाती माँ।
दानव दल को मार भगाती माँ॥
शव के ऊपर खड़ी महारानी, लाल जिह्वा वाली भवानी — जिनके घोर अट्टहास से पृथ्वी काँपती है और दानव-दल भाग जाते हैं।
जय काली माँ जय काली माँ।
जय श्याम काली महाकाली माँ।
ॐ जय काली माँ॥
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॥ आरती — तृतीय पद ॥
चण्ड मुण्ड का नाश किया माँ।
रक्तबीज का खून पिया माँ।
शुम्भ निशुम्भ को मारा माँ।
देवों का संकट टारा माँ॥
चण्ड-मुण्ड का संहार किया, रक्तबीज का रक्त पान किया, शुम्भ-निशुम्भ का वध करके देवताओं का संकट टाला।
जय काली माँ जय काली माँ।
जय श्याम काली महाकाली माँ।
ॐ जय काली माँ॥
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॥ आरती — चतुर्थ पद ॥
कालीघाट में वास तुम्हारा माँ।
दक्षिणेश्वर भी धाम तुम्हारा माँ।
रामकृष्ण ने पूजा की माँ।
अनन्य भक्ति की दीक्षा दी माँ॥
कालीघाट और दक्षिणेश्वर आपके धाम हैं। रामकृष्ण परमहंस ने आपकी उपासना की और अनन्य भक्ति की दीक्षा पाई।
जय काली माँ जय काली माँ।
जय श्याम काली महाकाली माँ।
ॐ जय काली माँ॥
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॥ आरती — पञ्चम पद ॥
ब्रह्मा विष्णु शिव तुम्हें ध्याते माँ।
इन्द्र आदि तव यश गाते माँ।
दस महाविद्या की तुम प्रथमा माँ।
सर्व जगत की तुम परमा माँ॥
ब्रह्मा, विष्णु, शिव और इन्द्र सभी आपका ध्यान करते और यश गाते हैं। दस महाविद्याओं में प्रथम — सर्व जगत की परम माँ।
जय काली माँ जय काली माँ।
जय श्याम काली महाकाली माँ।
ॐ जय काली माँ॥
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॥ आरती — षष्ठ पद ॥
भक्त की पीड़ा तुम जानती माँ।
मन की बात तुम मानती माँ।
दर पर जो भी आता है माँ।
खाली कभी न जाता है माँ॥
भक्त की पीड़ा जानती हैं, मन की बात मानती हैं। आपके द्वार पर जो भी आता है, वह कभी रिक्त हस्त नहीं जाता।
जय काली माँ जय काली माँ।
जय श्याम काली महाकाली माँ।
ॐ जय काली माँ॥
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॥ आरती — सप्तम पद ॥
निर्धन को तुम धन देती माँ।
सन्तानहीन को सन्तान देती माँ।
रोग शोक संकट हरती माँ।
अपने भक्तों पर कृपा करती माँ॥
निर्धन को धन, सन्तानहीन को सन्तान, रोग-शोक-संकट का नाश — अपने भक्तों पर अपार कृपा करती हैं।
जय काली माँ जय काली माँ।
जय श्याम काली महाकाली माँ।
ॐ जय काली माँ॥
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॥ आरती — अष्टम पद — मंगल प्रार्थना ॥
काली माँ की आरती जो गावे माँ।
सब सुख सम्पद नित पावे माँ।
पाप ताप संकट कट जाते माँ।
माँ काली के चरण में आते माँ॥
जो भक्त माँ काली की आरती गाता है उसे सभी सुख-सम्पदा मिलती है, पाप-ताप-संकट कट जाते हैं और माँ काली के चरणों में स्थान मिलता है।
जय काली माँ जय काली माँ।
जय श्याम काली महाकाली माँ।
जय जय जय महाकाली माँ।
ॐ क्रीं कालिकायै नमः॥
ॐ जय काली माँ॥
✦ काली आरती फल ✦
काली आरती प्रातः-सायं जो करे।
माँ काली की कृपा से जीवन भरे॥
सर्व संकट दूर होय तत्काल।
माँ की भक्ति से मिले खुशहाल॥
जो प्रातःकाल और सायंकाल माँ काली की आरती करता है उसका जीवन माँ की कृपा से भर जाता है। सभी संकट तत्काल दूर होते हैं और माँ की भक्ति से सुखी जीवन मिलता है।

🪔 काली आरती — विधि एवं महत्व

माँ काली की आरती पूजन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग है। आरती के समय दीप, धूप, पुष्प और नैवेद्य अर्पण करके भाव-भक्ति से गान करना चाहिए।

काली पूजा में विशेषतः अष्टमी, चतुर्दशी और अमावस्या को आरती का विशेष महत्व है। दीपावली की रात महाकाली पूजा और आरती विशेष रूप से की जाती है।

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दीप-दानआरती के समय पाँच या सात दीपकों से थाली सजाएँ। घी अथवा सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।
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पुष्प-अर्पणलाल गुड़हल (जासवंत) माँ काली को अत्यन्त प्रिय हैं। आरती से पूर्व पुष्प अर्पण करें।
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धूप-अगरबत्तीलोबान की धूप माँ काली को प्रिय है। आरती से पूर्व धूप जलाएँ।
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घण्टा-शंखआरती के दौरान घण्टा बजाते हुए शंख ध्वनि करें। यह वातावरण को शुद्ध और ऊर्जावान करती है।