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✦ शिव पुराण • लिंग पुराण • महाभारत अनुशासन पर्व ✦

Shiva Sahasranama

शिव सहस्रनाम
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स्थिरः स्थाणुः प्रभुर्भानुः प्रवरो वरदो वरः।
सर्वात्मा सर्वविख्यातः सर्वः सर्वकरो भवः॥

भगवान शिव के एक हजार दिव्य नाम — प्रत्येक नाम उनके एक गुण, रूप या लीला का प्रतीक है। महाभारत के अनुशासन पर्व में इन्हें भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को सुनाया था।

शिव पुराण • लिंग पुराण • महाभारत अनुशासन पर्व • १०००+ नाम
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✦ नाम यहाँ
१०००+
✦ कुल नाम
✦ वर्गीकरण
स्थिरः स्थाणुः🌿 प्रभुर्भानुः🌿 महादेवः🌿 शिवः शान्तः🌿 नीलकण्ठः🌿 त्र्यम्बकः🌿 भोलेनाथः🌿 महेश्वरः🌿 पशुपतिः🌿 रुद्रः🌿 विश्वनाथः🌿 भैरवः🌿 कपालमाली🌿 गंगाधरः🌿 अर्धनारीश्वरः🌿 स्थिरः स्थाणुः🌿 प्रभुर्भानुः🌿 महादेवः🌿 शिवः शान्तः🌿 नीलकण्ठः🌿 त्र्यम्बकः🌿 भोलेनाथः🌿 महेश्वरः🌿 पशुपतिः🌿 रुद्रः🌿 विश्वनाथः🌿 भैरवः🌿 कपालमाली🌿 गंगाधरः🌿 अर्धनारीश्वरः🌿
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✦ फलश्रुति — Phala Shruti ✦
शिवस्य नामसाहस्रं श्रुत्वा श्रद्धासमन्वितः।
सर्वपापविनिर्मुक्तो रुद्रलोकं स गच्छति॥
यः पठेन्नित्यमेकाग्रो मनसा कायकर्मणा।
तस्य सर्वाः प्रसिद्ध्यन्ति कामना नात्र संशयः॥
Śivasya Nāma-Sāhasraṃ Śrutvā Śraddhā-Samanvitaḥ | Sarva-Pāpa-Vinirmuktaḥ Rudra-Lokaṃ sa Gacchati
जो श्रद्धापूर्वक शिव के इन हजार नामों का श्रवण करता है — वह समस्त पापों से मुक्त होकर रुद्रलोक को प्राप्त करता है। जो प्रतिदिन एकाग्र होकर मन, वाणी और कर्म से इनका पाठ करता है — उसकी समस्त कामनाएँ पूर्ण होती हैं, इसमें कोई संशय नहीं।
✦ शिव के १०८ दिव्य नाम — अर्थ सहित ✦
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🌿 शिव सहस्रनाम — परम्परा और महत्व

शिव सहस्रनाम की परम्परा अत्यंत प्राचीन है। महाभारत के अनुशासन पर्व में भगवान कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को शिव के इन हजार नामों का उपदेश दिया। शिव पुराण और लिंग पुराण में भी इनका विस्तृत वर्णन है।

प्रत्येक नाम शिव के एक विशेष गुण, रूप, शक्ति या लीला का द्योतक है। "शिव" का अर्थ है मंगल, "रुद्र" का अर्थ है दुःख हरने वाला, "महेश्वर" का अर्थ है महान ईश्वर — इस प्रकार प्रत्येक नाम एक पूर्ण ध्यान है।

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स्रोतमहाभारत अनुशासन पर्व, शिव पुराण (उमा संहिता), लिंग पुराण — तीनों में शिव सहस्रनाम उपलब्ध है।
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कृष्ण का उपदेशमहाभारत में भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया कि जो ये नाम जपता है, वह स्वयं शिव के तुल्य हो जाता है।
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पाठ की विधिनित्य प्रातः स्नान के बाद शिवलिंग के सामने बैठकर श्रद्धापूर्वक पाठ करें। प्रत्येक नाम के बाद "नमः" जोड़ सकते हैं।
विशेष अवसरसोमवार, प्रदोष, महाशिवरात्रि और श्रावण मास में पाठ करने से अनंत गुना फल प्राप्त होता है।
✦ पाठ के लाभ ✦
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रुद्रलोक की प्राप्ति
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समस्त पापों का नाश
💰
धन, सौभाग्य और यश
💊
रोग-नाश और स्वास्थ्य
🧠
ज्ञान और विवेक की वृद्धि
🙏
मोक्ष और मुक्ति
✦ पाठ विधि ✦
🌅 ब्रह्म-मुहूर्त
सर्वोत्तम समय
🛁 स्नान
स्वच्छ होकर पाठ करें
🌿 बेल-पत्र
शिव को अर्पित करें
📿 माला
रुद्राक्ष माला से जप
🕯️ दीप
घी का दीपक जलाएँ
✦ संबंधित स्तोत्र ✦
🏛️ लिंगाष्टकम्
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🌿 भक्तों के विचार
S
Sunita Agarwal
14 फरवरी 2025 — महाशिवरात्रि
महाशिवरात्रि पर रात भर शिव सहस्रनाम का पाठ किया। प्रत्येक नाम में एक अलग ऊर्जा है। "नीलकण्ठः" — जब यह नाम आता है तो मन विशेष रूप से शांत हो जाता है। नाम खोज की सुविधा बहुत उपयोगी है! अर्थ सहित पाठ करने से अनुभव बिल्कुल अलग होता है। 🙏🌿
R
Rajiv Shankar
9 अगस्त 2024 — श्रावण
श्रावण के हर सोमवार नित्य सहस्रनाम का पाठ करता हूँ। "पशुपतिः" — यह नाम सुनकर एहसास होता है कि समस्त जीवों के नाथ वही हैं। "भैरवः" नाम में जो ऊर्जा है वह अद्वितीय है। इस पेज पर अर्थ सहित प्रत्येक नाम देखकर पाठ और भी गहरा हो गया। बम बम भोले! 🔱
M
Meenakshi Iyer
1 मार्च 2025
मेरी माँ रोज़ सहस्रनाम पढ़ती थीं — मुझे उनकी याद आई जब मैंने यहाँ "अर्धनारीश्वरः" देखा। शिव और शक्ति का मिलन — कितना गहरा दर्शन है। "गंगाधरः" नाम में करुणा की पराकाष्ठा है। हर हर महादेव! ॐ नमः शिवाय! 🌿☽
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