वेद का सर्वोच्च छंद — गायत्री — जब शिव के लिए प्रकट होता है तब बनता है शिव गायत्री। तत्पुरुष (परम पुरुष), महादेव (देवाधिदेव) और रुद्र (ज्ञान-प्रेरक) — एक ही मंत्र में त्रिविध शिव।
गायत्री छंद को वेदों का माँ कहा जाता है — यह ३ पंक्तियों में ८-८-८ (कुल २४) अक्षरों का दिव्य छंद है। सामान्यतः सवित्र-गायत्री (ॐ भूर्भुवः स्वः...) प्रसिद्ध है, किंतु प्रत्येक देवता की गायत्री होती है।
शिव गायत्री में "तत्पुरुष" शिव के पञ्चमुखों में से एक है (तत्पुरुष, अघोर, सद्योजात, वामदेव, ईशान)। यह मंत्र शिव के ज्ञान-स्वरूप की स्तुति है। रुद्र यहाँ संहार-शक्ति नहीं — ज्ञान-प्रेरक शक्ति के रूप में है।
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