✦ गायत्री छंद — शिव-मंत्र-राज ✦

Shiv Gayatri

शिव गायत्री
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वेद का सर्वोच्च छंद — गायत्री — जब शिव के लिए प्रकट होता है तब बनता है शिव गायत्री। तत्पुरुष (परम पुरुष), महादेव (देवाधिदेव) और रुद्र (ज्ञान-प्रेरक) — एक ही मंत्र में त्रिविध शिव।

गायत्री छंद • २४ अक्षर • त्रिपद
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे
महादेवाय धीमहि।
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
Oṃ Tatpuruṣāya Vidmahe | Mahādevāya Dhīmahi | Tanno Rudraḥ Pracodayāt
पद १ — ध्यान विद्महे हम जानते हैं, हम ध्यान करते हैं
पद २ — उपासना धीमहि हम धारण करते हैं, ध्यान में लीन हैं
पद ३ — प्रार्थना प्रचोदयात् वह हमें प्रेरित करें, जागृत करें
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे🌅 महादेवाय धीमहि🌅 तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्🌅 ॐ नमः शिवाय🌅 Oṃ Tatpuruṣāya Vidmahe🌅 Mahādevāya Dhīmahi🌅 Tanno Rudraḥ Pracodayāt🌅 ॐ तत्पुरुषाय विद्महे🌅 महादेवाय धीमहि🌅 तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्🌅 ॐ नमः शिवाय🌅 Oṃ Tatpuruṣāya Vidmahe🌅 Mahādevāya Dhīmahi🌅 Tanno Rudraḥ Pracodayāt🌅
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✦ शिव गायत्री — सम्पूर्ण विवेचन ✦
✦ सम्पूर्ण मंत्र ✦
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे
महादेवाय धीमहि।
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
Oṃ Tatpuruṣāya Vidmahe | Mahādevāya Dhīmahi | Tanno Rudraḥ Pracodayāt
✦ सम्पूर्ण अर्थ ✦
ॐ — हम तत्पुरुष (परम पुरुष, सर्वोच्च चेतना) को जानते हैं, ध्यान करते हैं। हम महादेव (देवों के देव, शिव) का ध्यान धारण करते हैं। वह रुद्र (ज्ञान का प्रकाश देने वाले, रोलाने वाले) हमें प्रेरित करें — हमारी बुद्धि, मन और आत्मा को जागृत और प्रकाशित करें।
✦ शब्द-शब्द विश्लेषण ✦
✦ प्रत्येक शब्द का अर्थ ✦
Om
प्रणव — ब्रह्म का प्रतीक, सर्वव्यापी नाद
तत्पुरुषाय Tatpuruṣāya
उस परम पुरुष के लिए — सर्वोच्च चेतना, शिव का पञ्चवक्र नाम
विद्महे Vidmahe
हम जानते हैं, हम ध्यान करते हैं — विद् धातु से (ज्ञान)
महादेवाय Mahādevāya
महान् देव के लिए — देवाधिदेव, सर्वोच्च देवता
धीमहि Dhīmahi
हम ध्यान धारण करें — धी (बुद्धि) + माहि (धारण)
तन्नो Tanno
तत् + नः — वह हमारे लिए, हमारे लाभ के लिए
रुद्रः Rudraḥ
रुद्र — रोलाने वाले, दुःख-नाशक, ज्ञान-दाता शिव
प्रचोदयात् Pracodayāt
प्रेरित करें, जागृत करें, प्रकाशित करें — बुद्धि को
✦ त्रिपद गायत्री — तीन भाग ✦
पद
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे
Om Tatpuruṣāya Vidmahe
यह प्रथम पद ध्यान-बीज है। "तत्पुरुष" शिव के पञ्चमुखों में से एक है — पूर्व-मुख, ज्ञान और बुद्धि का प्रतीक। "विद्महे" का अर्थ है — हम जानते हैं, हम साक्षात्कार करते हैं। यह पद उपासक के ज्ञान-प्रयास को व्यक्त करता है।
पद
महादेवाय धीमहि।
Mahādevāya Dhīmahi
"महादेव" — महान् देव, देवताओं में सर्वश्रेष्ठ। "धीमहि" में धी शब्द गायत्री का हृदय है — बुद्धि, विवेक, प्रज्ञा। यह पद उपासना का शिखर है जहाँ साधक महादेव को अपनी बुद्धि में धारण करता है।
पद
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
Tanno Rudraḥ Pracodayāt
"रुद्र" — रोलाने वाले, संसार के दुःखों को नष्ट करने वाले। "प्रचोदयात्" — प्रेरित करें, जागृत करें। यह तृतीय पद प्रार्थना है — रुद्र से याचना कि वे हमारी बुद्धि को प्रेरित और प्रकाशित करें।
✦ जप विधि ✦
✦ शिव गायत्री जप विधि ✦
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ब्रह्म-मुहूर्तसूर्योदय से ४८ मिनट पहले — जब आकाश में प्रथम प्रकाश आए, तब इस मंत्र का जप सर्वाधिक फलदायी है। उगते सूर्य की दिशा में मुख करें।
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रुद्राक्ष माला१०८ दाने की रुद्राक्ष माला पर जप करें। प्रतिदिन न्यूनतम ३ माला (३२४ जप) — विशेष साधना में १०८ माला (११,६६४ जप)।
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आसन और मुद्रापद्मासन या सुखासन में बैठें। ज्ञान-मुद्रा (अँगूठा-तर्जनी मिलाएँ) — यह बुद्धि-प्रेरणा की मुद्रा है, गायत्री के "धी" के अनुकूल।
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श्वास-लयप्रत्येक पद पर एक गहरी श्वास — तत्पुरुषाय विद्महे (श्वास लेते हुए), महादेवाय धीमहि (थामते हुए), तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् (छोड़ते हुए)।
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भावनाजप करते समय भावना करें — शिव का सूर्य-मंडल-स्वरूप उगते सूर्य की तरह आपकी बुद्धि को प्रकाशित कर रहा है। रुद्र की रोशनी आपके मस्तक में प्रवेश कर रही है।
✦ फलश्रुति — मंत्र का फल ✦
✦ फलश्रुति ✦
शिवगायत्रीं जपेन्नित्यं शिवभक्तिपरायणः।
सर्वपापविनिर्मुक्तः शिवलोकं स गच्छति॥
गायत्रीं शिवरूपां च यो जपेत् नियतेन्द्रियः।
तस्य बुद्धिर्महायोगी रुद्रतेजसि लीयते॥
Śivagāyatrīṃ japen nityaṃ śivabhaktiparāyaṇaḥ | Sarvapāpavinirmuktaḥ śivalokaṃ sa gacchati | Gāyatrīṃ śivarūpāṃ ca yo japet niyatendriyaḥ | Tasya buddhir mahāyogī rudratejasi līyate
जो शिव-भक्त नित्य शिव गायत्री का जप करता है, वह सब पापों से मुक्त होकर शिवलोक जाता है। जो जितेन्द्रिय होकर शिव-रूप गायत्री का जप करता है, उसकी बुद्धि रुद्र-तेज में विलीन हो जाती है — महायोगी बन जाता है।

🌅 शिव गायत्री — वेद का सूर्य

गायत्री छंद को वेदों का माँ कहा जाता है — यह ३ पंक्तियों में ८-८-८ (कुल २४) अक्षरों का दिव्य छंद है। सामान्यतः सवित्र-गायत्री (ॐ भूर्भुवः स्वः...) प्रसिद्ध है, किंतु प्रत्येक देवता की गायत्री होती है।

शिव गायत्री में "तत्पुरुष" शिव के पञ्चमुखों में से एक है (तत्पुरुष, अघोर, सद्योजात, वामदेव, ईशान)। यह मंत्र शिव के ज्ञान-स्वरूप की स्तुति है। रुद्र यहाँ संहार-शक्ति नहीं — ज्ञान-प्रेरक शक्ति के रूप में है।

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गायत्री छंद — २४ अक्षरॐ तत्पुरुषाय विद्महे (८) | महादेवाय धीमहि (८) | तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् (८) — तीन पद, प्रत्येक में ८ अक्षर। यही गायत्री छंद का नियम है।
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धी — बुद्धि का मंत्र"धीमहि" शब्द में "धी" (बुद्धि/विवेक) है — गायत्री मंत्र का यही हृदय है। शिव गायत्री बुद्धि-वर्धन के लिए सर्वश्रेष्ठ मंत्र है। विद्यार्थियों के लिए विशेष फलदायी।
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तत्पुरुष — पञ्चवक्र शिवतत्पुरुष शिव के पाँच मुखों में पूर्व-मुख है — पीत-वर्ण, ज्ञान का प्रतीक। तत्पुरुष के मंत्र "ॐ नमस्ते तत्पुरुषाय" की यह गायत्री रूप है।
रुद्र-तेज — ज्ञान का प्रकाशअंतिम पद में "रुद्रः प्रचोदयात्" — रुद्र प्रेरित करें। यहाँ रुद्र संहार-रूप नहीं, बल्कि ज्ञान-प्रकाश-रूप में हैं। जैसे सूर्य अंधकार नष्ट करता है, रुद्र-तेज अज्ञान नष्ट करता है।
🌅 भक्तों के विचार

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SHIV GAYATRI
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे