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✦ नित्य पूजा • लक्ष्मी आरती ✦

Lakshmi Mata Aarti

ॐ जय लक्ष्मी माता
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माँ लक्ष्मी की सबसे प्रचलित और पावन आरती — "ॐ जय लक्ष्मी माता" — जो प्रत्येक लक्ष्मी पूजन और दीपावली पर गाई जाती है। इसके गायन से घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

पद
१९वीं सदी
रचना काल
हिन्दी
भाषा
शुक्रवार
विशेष दिन
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घर में लक्ष्मी
💰
धन समृद्धि
पाप नाश
🌸
मन आनन्द
🏠
परिवार सुख

✦ आरती परिचय

"ॐ जय लक्ष्मी माता" माँ महालक्ष्मी की सर्वाधिक लोकप्रिय आरती है। इसकी रचना १९वीं शताब्दी में पण्डित शारदाराम फिल्लौरी ने की थी — वही महान विद्वान जिन्होंने "ॐ जय जगदीश हरे" आरती भी रची। इस आरती में माँ लक्ष्मी को उमा, रमा, ब्रह्माणी, दुर्गा और जगन्माता के रूप में वर्णित किया गया है। इसे सायंकाल दीपक जलाकर गाने से माँ का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

✦ सम्पूर्ण आरती ✦
ॐ जय लक्ष्मी माता
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता ॥
✦ ॐ जय लक्ष्मी माता ✦
पद ॥ १ ॥
उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग माता ।
सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥
Uma Rama Brahmani, Tum Hi Jag Mata |
Surya Chandrama Dhyavat, Narad Rishi Gata ||
आप उमा (पार्वती), रमा (लक्ष्मी) और ब्रह्माणी — सभी रूपों में एक ही जगन्माता हैं। सूर्य और चन्द्रमा आपका ध्यान करते हैं, नारद ऋषि आपकी स्तुति करते हैं।
✦ ॐ जय लक्ष्मी माता ✦
पद ॥ २ ॥
दुर्गा रूप निरञ्जनि, सुख सम्पत्ति दाता ।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि सिद्धि धन पाता ॥
Durga Roop Niranjani, Sukh Sampatti Data |
Jo Koi Tumko Dhyavat, Riddhi Siddhi Dhan Pata ||
आप दुर्गा के निर्मल रूप में सुख-सम्पत्ति प्रदान करती हैं। जो भी आपका ध्यान करता है उसे ऋद्धि, सिद्धि और धन की प्राप्ति होती है।
✦ ॐ जय लक्ष्मी माता ✦
पद ॥ ३ ॥
तुम पाताल निवासिनि, तुम ही शुभ दाता ।
कर्म प्रभाव प्रकाशिनि, भवनिधि की त्राता ॥
Tum Patal Nivasini, Tum Hi Shubh Data |
Karma Prabhav Prakashini, Bhavnidhi Ki Trata ||
आप पाताल में भी निवास करती हैं और शुभ देने वाली हैं। आप कर्म के प्रभाव को प्रकाशित करती हैं और भवसागर से हमारी रक्षा करती हैं।
✦ ॐ जय लक्ष्मी माता ✦
पद ॥ ४ ॥
जिस घर में तुम रहती, सब सद्गुण आता ।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता ॥
Jis Ghar Main Tum Rahti, Sab Sadgun Aata |
Sab Sambhav Ho Jata, Man Nahi Ghabrata ||
जिस घर में आप निवास करती हैं वहाँ सभी सद्गुणों का आगमन होता है। सब कुछ सम्भव हो जाता है और मन कभी नहीं घबराता।
✦ ॐ जय लक्ष्मी माता ✦
पद ॥ ५ ॥
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता ।
खान पान का वैभव, सब तुमसे आता ॥
Tum Bin Yagya Na Hote, Vastra Na Koi Pata |
Khan Pan Ka Vaibhav, Sab Tumse Aata ||
आपके बिना न यज्ञ होता है, न कोई वस्त्र प्राप्त कर पाता है। खाने-पीने का सारा वैभव आपसे ही प्राप्त होता है।
✦ ॐ जय लक्ष्मी माता ✦
पद ॥ ६ ॥
शुभ गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि जाता ।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता ॥
Shubh Gun Mandir Sundar, Kshirodadhi Jata |
Ratna Chaturdash Tum Bin, Koi Nahi Pata ||
आप सुन्दर शुभ गुणों की मन्दिर हैं, क्षीरसागर में निवास करती हैं। आपके बिना कोई चौदह रत्न नहीं प्राप्त कर सकता।
✦ ॐ जय लक्ष्मी माता ✦
पद ॥ ७ ॥
महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई जन गाता ।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता ॥
Mahalakshmi Ji Ki Aarti, Jo Koi Jan Gata |
Ur Anand Samata, Paap Utar Jata ||
जो कोई भी महालक्ष्मी जी की यह आरती गाता है, उसके हृदय में आनन्द भर जाता है और सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता ॥
✦ ॐ जय लक्ष्मी माता ✦
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✦ आरती का फल ✦

महालक्ष्मी जी की आरती जो कोई जन गाता ।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता ॥

जो व्यक्ति नित्य श्रद्धापूर्वक यह आरती गाता है, उसके घर में माँ लक्ष्मी का सदैव वास होता है और उसके सभी दुःख दूर होते हैं।

आरती का समय
सायंकाल सन्ध्याकाल में दीपक जलाकर आरती गाएँ। शुक्रवार और दीपावली पर विशेष फलदायी।
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दीपक
पाँच बत्तियों का घी का दीपक जलाएँ। आरती की थाली में रोली, कुमकुम और फूल रखें।
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घण्टी और शंख
आरती के समय घण्टी बजाएँ। शंख ध्वनि से वातावरण पवित्र होता है और माँ लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
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पुष्प वर्षा
आरती के बाद माँ पर पुष्प अर्पित करें। कमल, गुलाब और गेंदे के फूल माँ लक्ष्मी को अति प्रिय हैं।

✦ अन्य लक्ष्मी मंत्र एवं स्तोत्र ✦

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