जगद्गुरु आदि शंकराचार्य द्वारा रचित लक्ष्मी की यह आठ-श्लोकी स्तुति क्षीरसागर से उत्पन्न, विष्णु-वक्षस्थलनिवासिनी और परम सौभाग्य प्रदायिनी माँ लक्ष्मी का अद्भुत वर्णन है।
लक्ष्म्यष्टकम् जगद्गुरु आदि शंकराचार्य द्वारा रचित वह अपूर्व स्तोत्र है जिसमें माँ लक्ष्मी के आठ दिव्य रूपों का वर्णन है। इस स्तोत्र में लक्ष्मी को क्षीरसागर की पुत्री, विष्णु-वक्षस्थल-निवासिनी और ब्राह्मणों की प्रिया बताया गया है। यह स्तोत्र श्री विद्या परम्परा में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
लक्ष्म्यष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् भक्तिमान्नरः ।
श्रिया युक्तः सुखं नित्यं राज्यं प्राप्नोति सर्वदा ॥
जो भक्त इस पवित्र लक्ष्म्यष्टकम् का पाठ करता है, वह सदैव लक्ष्मी और सुख से युक्त रहता है और सर्वदा राज्यसुख को प्राप्त करता है।