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✦ भक्ति गीत • ४० चौपाई ✦

Lakshmi Chalisa

श्री लक्ष्मी चालीसा
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माँ लक्ष्मी को समर्पित ४० चौपाइयों की यह पावन चालीसा धन, सम्पदा और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए प्रतिदिन पढ़ी जाती है। शुक्रवार को पाठ विशेष फलदायी है।

४०
चौपाई
रामदास
रचयिता
हिन्दी
भाषा
१०-१५
मिनट
💰
धन प्राप्ति
🏠
घर में सुख
💪
शत्रु नाश
🌸
मनोकामना
पाप नाश

✦ चालीसा परिचय

लक्ष्मी चालीसा माँ महालक्ष्मी की स्तुति में रचित चालीस चौपाइयों का एक भक्तिपूर्ण संग्रह है। इसमें माँ लक्ष्मी के विभिन्न रूपों — सिंधुपुत्री, पद्मावती, विष्णुप्रिया — की महिमा का वर्णन है। शुक्रवार को प्रातःकाल या सायंकाल इस चालीसा का पाठ करने से माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

✦ प्रारम्भिक दोहा ✦
दोहा ॥ मंगलाचरण ॥
मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास ।
मनोकामना सिद्ध करि, पुरावो मेरी आस ॥
हे माँ लक्ष्मी! कृपा करके मेरे हृदय में निवास करो और मेरी मनोकामनाओं को सिद्ध करके मेरी आशाएँ पूरी करो।
दोहा ॥ द्वितीय ॥
यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करुँ ।
सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदम्बिका ॥
✦ चालीसा — चौपाई ✦
चौपाई ॥ १-२ ॥
सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही । ज्ञान बुद्धि विद्या दो मोही ॥
तुम सम नहीं कोई उपकारी । सब विधि पुरवहु आस हमारी ॥
चौपाई ॥ ३-४ ॥
जय जय जगत जननि जगदम्बा । सबकी तुम ही हो अवलम्बा ॥
तुम ही हो सब घट घट वासी । विनती यही हमारी खासी ॥
चौपाई ॥ ५-६ ॥
जगजननी जय सिन्धु कुमारी । दीनन की तुम हो हितकारी ॥
विनवाउँ नित्य तुम्हीं महारानी । कृपा करौ जग जननि भवानी ॥
चौपाई ॥ ७-८ ॥
केहि विधि स्तुति करौं तिहारी । सुधि लीजै अपराध बिसारी ॥
कृपा दृष्टि चितवो मम ओरी । जगजननी विनती सुन मोरी ॥
चौपाई ॥ ९-१० ॥
ज्ञान बुद्धि जय सुख की दाता । संकट हरो हमारी माता ॥
क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो । चौदह रत्न सिन्धु में पायो ॥
चौपाई ॥ ११-१२ ॥
चौदह रत्न में तुम सुखरासी । सेवा कियो प्रभु बनि दासी ॥
जब जब जन्म जहाँ प्रभु लीन्हा । रूप बदल तहाँ सेवा कीन्हा ॥
चौपाई ॥ १३-१४ ॥
स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा । लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा ॥
तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं । सेवा कियो हृदय पुलकाहीं ॥
चौपाई ॥ १५-१६ ॥
अपनाया तोहि अन्तर्यामी । विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी ॥
तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी । कहाँ लौ महिमा कहूँ बखानी ॥
चौपाई ॥ १७-१८ ॥
मन क्रम वचन करि सेवा तोरी । करहु कृपा जग जननि मोरी ॥
लाखों भक्त चरन पर आवैं । सुख सम्पत्ति अपार पावैं ॥
चौपाई ॥ १९-२० ॥
जो पावत तव दर्शन माता । धन धान्य सम्पत्ति की दाता ॥
तुमको निशदिन सेवत सोई । हरि विष्णु विधाता वह होई ॥
✦ आगे की चौपाई ✦
चौपाई ॥ २१-२२ ॥
उमा रमा ब्रह्माणी तुम ही जग माता । सूर्य चन्द्रमा ध्यावत नारद ऋषि गाता ॥
दुर्गा रूप निरञ्जनि सुख सम्पत्ति दाता । जो कोई तुमको ध्यावत ऋद्धि सिद्धि धन पाता ॥
चौपाई ॥ २३-२४ ॥
तुम पाताल निवासिनि तुम ही शुभ दाता । कर्म प्रभाव प्रकाशिनि भवनिधि की त्राता ॥
जिस घर में तुम रहती सब सद्गुण आता । सब सम्भव हो जाता मन नहीं घबराता ॥
चौपाई ॥ २५-२६ ॥
तुम बिन यज्ञ न होते वस्त्र न कोई पाता । खान पान का वैभव सब तुमसे आता ॥
शुभ गुण मन्दिर सुन्दर क्षीरोदधि जाता । रत्न चतुर्दश तुम बिन कोई नहीं पाता ॥
चौपाई ॥ २७-२८ ॥
हल्दी कुमकुम रोली अर्पण लायें भाई । पुष्प सुगन्धि दीपक से पूजा करें सदाई ॥
चार हाथ दो कमल पकड़े शोभा पाई । श्वेत वर्ण की देवी कमल सिंहासन छाई ॥
चौपाई ॥ २९-३० ॥
जो कोई तुमको ध्यावत नित्य मंगल पावत । घर में लक्ष्मी का वास होत दुःख मिट जावत ॥
विष्णु प्रिया तुम जग में जग की जननी माता । जगत पालिनि तुम ही हो सबको सुख देती दाता ॥
चौपाई ॥ ३१-३२ ॥
परिवार सुखी करती दुःख सब मिट जाते । शत्रु शोक संकट सभी दूर हट जाते ॥
जय जय जय लक्ष्मी माँ बारम्बार गाते । भक्तजन सुख पाते मन में हर्ष समाते ॥
चौपाई ॥ ३३-३४ ॥
दीपावली की रात्रि को पूजा जब होती । लक्ष्मी-गणेश के दर्शन घर में ज्योत होती ॥
धन वर्षा होती है मन में शान्ति आती । माँ लक्ष्मी की कृपा से सब मनोरथ पाती ॥
चौपाई ॥ ३५-३६ ॥
ध्यान धरो माँ लक्ष्मी का जीवन में सदा रहो । श्रीं बीज मंत्र का जाप प्रेम से जपते रहो ॥
सेवा पूजा अर्चना निरन्तर करते रहो । माँ लक्ष्मी की कृपा से जीवन सफल बनो ॥
चौपाई ॥ ३७-३८ ॥
भक्ति भाव से पूजन करो माँ प्रसन्न होती हैं । समृद्धि सुख सौभाग्य सभी वरदान देती हैं ॥
निर्धन को धन देती माँ दुखियों का दुख हरती । भक्तों के घर माँ स्वयं पधारकर प्रसन्न करती ॥
चौपाई ॥ ३९-४० ॥
तन मन धन सब तुमको अर्पित माँ शिव शक्ति रूपा । जय लक्ष्मी जय लक्ष्मी जय माँ लक्ष्मी अनूपा ॥
माँ लक्ष्मी की चालीसा जो पढ़े श्रद्धा लाई । सुख सम्पत्ति मिले उसे माँ की कृपा छाई ॥
✦ समापन दोहा ✦
दोहा ॥ समापन १ ॥
त्राहि त्राहि दुख हारिणि हरो वेगि सब त्रास ।
जयति जयति जय लक्ष्मी करो शत्रु को नाश ॥
दोहा ॥ समापन २ ॥
रामदास धरि ध्यान नित्य विनय करत कर जोर ।
मातु लक्ष्मी दास पर करहु दया की कोर ॥
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✦ पाठ का फल ✦

जो नित्य शुद्ध होकर श्रद्धापूर्वक इस चालीसा का पाठ करता है, उसके घर में माँ लक्ष्मी सदा निवास करती हैं। धन-धान्य, सुख-समृद्धि और मनोवाञ्छित फल की प्राप्ति होती है।

पाठ काल
शुक्रवार प्रातःकाल या सायंकाल। दीपावली की रात्रि को पाठ सर्वोत्तम।
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पूजा विधि
स्नान के बाद लाल वस्त्र धारण करें। माँ लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाएँ।
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पुष्प अर्पण
पीले और लाल पुष्प, कमल, गेंदा अर्पित करें। हल्दी और कुमकुम से पूजा करें।
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जप संख्या
चालीसा का पाठ करने के बाद ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः का ११ या १०८ बार जप करें।

✦ अन्य लक्ष्मी मंत्र एवं स्तोत्र ✦

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