पद्म पुराण से लिया गया देवराज इन्द्र द्वारा रचित महालक्ष्मी का यह आठ-श्लोकी स्तोत्र। नित्य पाठ से समस्त सिद्धि, राज्यप्राप्ति और महाशत्रु-नाश होता है।
महालक्ष्म्यष्टकम् पद्म पुराण से लिया गया वह पवित्र स्तोत्र है जिसे देवराज इन्द्र ने स्वयं महालक्ष्मी की स्तुति में रचा था। इसमें महालक्ष्मी के आठ दिव्य रूपों की स्तुति की गई है। यह एकबार पाठ करने से महापाप का नाश, दोबार पाठ से धन-धान्य की प्राप्ति और तीन बार पाठ से महाशत्रुओं का नाश होता है।
महालक्ष्म्यष्टकं स्तोत्रं यः पठेद्भक्तिमान्नरः ।
सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा ॥
एककालं पठेन्नित्यं महापापविनाशनम् ।
द्विकालं यः पठेन्नित्यं धनधान्यसमन्वितम् ॥
त्रिकालं यः पठेन्नित्यं महाशत्रुविनाशनम् ।
महालक्ष्मिर्भवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा ॥