बड़ सुखसार पाओल तुअ तीरे
Bar Sukhsar Paol Tua Tere — मैथिली • विद्यापति
विद्यापति रचित मैथिली भजन — शिव/गौरी परंपरागत गीत शैली में।
✦ पाठ — Refrain ✦
बड़ सुखसार पाओल तुअ तीरे
छाड़इते निकट नयन बह नीरे
बड़ सुखसार पाओल तुअ तीरे
अन्तरा १
कर जोड़ि बिनमञो विमलतरङ्गे,
पुन दरसन होअ पुनिमति गङ्गे;
कर जोड़ि बिनमञो विमलतरङ्गे,
पुन दरसन होअ पुनिमति गङ्गे — बड़ सुखसार पाओल तुअ तीरे
(हाथ जोड़कर विनम्रता से) फिर से दर्शन हुआ — फुल-सी निर्मल गंगा को देखा; इस तरह पुनः दर्शन का सुख मिला।
अन्तरा २
एक अपराध छेँमब मोर जानी,
परसल माए पाए तुअ पानी;
एक अपराध छेँमब मोर जानी,
परसल माए पाए तुअ पानी — बड़ सुखसार पाओल तुअ तीरे
(मेरा एक अपराध माना जाए) परस कर मांझ पवित्र जल प्राप्त हुआ — तिरे पर मिलने से जीवन का यह सुख प्राप्त हुआ।
अन्तरा ३
कि करब जप तप जोग धेआने,
जनम सुफल भेल एकहि सनाने;
कि करब जप तप जोग धेआने,
जनम कृतार्थ एकहि सनाने — बड़ सुखसार पाओल तुअ तीरे
जप-तप और योग क्या करूँ — एक बार तिर पर पहुँचना ही जीवन का फल सिद्ध कर देता है।
अन्तरा ४ (भनहि विद्यापति)
भनइ विद्यापति समन्दञो तोही,
अंत काल जनु बिसरह मोही;
भनइ विद्यापति समन्दञो तोही,
अंत काल जनु बिसरह मोही — बड़ सुखसार पाओल तुअ तीरे
विद्यापति कहते हैं — अंतिम समय में भी मुझे नहीं भूलो; यह भावना काव्य की भनिता है।
© ShivaMarg — Vidyapati Geet Sangrah