✦ सम्पूर्ण मंत्र • यंत्र • चाँजने स्तुति कथा ✦

Durga Chamapan Stotram

अथ श्री दुर्गा चमापन स्तोत्रम्
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माँ दुर्गे की चमापन — क्षमा-याचना स्तुति, जिसमें भक्त अपनी त्रुटियों के लिए क्षमा माँगता है और देवी के चरणों में समर्पण करता है। इसमें मंत्र, यंत्र और कथा तीनों समाहित हैं।

मंत्र • यंत्र • चाँजने स्तुति • क्षमापन
अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया
अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम् पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वरि जय माता दी अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम् पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वरि जय माता दी
✦ अथ श्री दुर्गा चमापन स्तोत्रम् — सम्पूर्ण पाठ ✦
✦ श्री दुर्गा यंत्र ✦
श्री दुर्गा यंत्र — त्रिकोण, षट्कोण और बिन्दु से युक्त यह यंत्र माँ दुर्गे की शक्ति का प्रतीक है। इस यंत्र को घर में स्थापित कर पूजन करने से समस्त विघ्न दूर होते हैं।
✦ दुर्गा मूल मंत्र ✦
ॐ दुं दुर्गायै नमः॥

ॐ ह्रीं दुं दुर्गायै नमः॥

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
ये तीन मूल मंत्र माँ दुर्गे की उपासना के आधार हैं। 'दुं' दुर्गा का बीज, 'ह्रीं' माया का बीज और 'ऐं ह्रीं क्लीं' त्रिशक्ति के बीज हैं। 'चामुण्डायै विच्चे' — चामुण्डा देवी को नमस्कार।
✦ चमापन स्तोत्र — क्षमा-याचना ✦
॥ श्लोक १ ॥
अज्ञानता की क्षमा
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वरि॥
हे परमेश्वरि! मुझे आवाहन का ज्ञान नहीं, विसर्जन का भी ज्ञान नहीं। पूजन विधि भी मुझे नहीं आती — कृपा करके क्षमा करें।
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॥ श्लोक २ ॥
मंत्रहीनता की क्षमा
मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि।
यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे॥
हे सुरेश्वरि! मैं मंत्रहीन, क्रियाहीन और भक्तिहीन हूँ — फिर भी जो मैंने पूजन किया, हे देवि! वह आपकी कृपा से पूर्ण हो जाए।
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॥ श्लोक ३ ॥
अपराध की क्षमा
अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।
दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि॥
हे परमेश्वरि! मुझसे रात-दिन हजारों अपराध होते रहते हैं — मुझे अपना दास समझकर क्षमा करें।
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॥ श्लोक ४ ॥
शरणागति
गतं पापं गतं दुःखं गतं दारिद्र्यमेव च।
आगता सुख-सम्पत्तिः पुण्यां च तव दर्शनात्॥
तेरे दर्शन से पाप, दुःख और दारिद्र्य — सब दूर हो गए। सुख, सम्पत्ति और पुण्य की प्राप्ति हुई।
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॥ श्लोक ५ ॥
देवी-स्तुति
सर्वस्य बुद्धिरूपेण जनस्य हृदि संस्थिते।
स्वर्गापवर्गदे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
हे देवी नारायणी! जो सभी मनुष्यों के हृदय में बुद्धि-रूप में विराजमान हैं, जो स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करती हैं — आपको नमस्कार।
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✦ चाँजने स्तुति — Chanjane Stuti ✦
✦ चाँजने स्तुति कथा ✦

एक बार भगवान शिव ने माँ पार्वती से कहा — "देवि! जो भक्त अज्ञानतावश पूजन में त्रुटि करे या विधि न जाने, उसके लिए एक विशेष चाँजने स्तुति का विधान है।"

माँ दुर्गे ने प्रसन्न होकर कहा — "जो भक्त मेरी पूजा में चाहे कोई भी त्रुटि हो जाए, लेकिन हृदय में सच्ची भक्ति हो और वह अपने अपराध स्वीकार करके क्षमा माँगे, उसकी पूजा पूर्ण मानी जाएगी।"

इसी आधार पर चमापन (क्षमापन) स्तोत्र की रचना हुई, जिसे पूजन के अंत में पढ़ने से समस्त त्रुटियाँ और दोष नष्ट हो जाते हैं।

॥ चाँजने श्लोक १ ॥
कायिक-वाचिक-मानसिक अपराध
कायेन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा
बुद्ध्यात्मना वा प्रकृतेः स्वभावात्।
करोमि यद्यत् सकलं परस्मै
नारायणायेति समर्पयामि॥
शरीर, वाणी, मन, इन्द्रियों, बुद्धि या स्वभाव से जो कुछ भी मैं करता हूँ — वह सब परम नारायण (माँ) को समर्पित करता हूँ।
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॥ चाँजने श्लोक २ ॥
देवी का समर्पण
यदक्षरं पदभ्रष्टं मात्राहीनं च यद्भवेत्।
तत्सर्वं क्षम्यतां देवि प्रसीद परमेश्वरि॥
मंत्र-पाठ में जो अक्षर या मात्राएँ छूट गई हों — वह सब क्षमा हो, हे देवी परमेश्वरि! कृपया प्रसन्न हों।
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॥ चाँजने श्लोक ३ ॥
सम्पूर्ण समर्पण
अनयाराधनया देवि सम्प्रीता भव सुन्दरि।
अनया सप्तशतीसेवया देवि प्रसीद मे॥
हे सुन्दरि देवी! इस आराधना से प्रसन्न हों — इस सप्तशती-सेवा से मुझ पर प्रसन्न होकर कृपा बरसाएँ।
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॥ अंतिम श्लोक ॥
नारायणी स्तुति
शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
शरणागत, दीन और पीड़ितों की रक्षा में तत्पर, सबकी पीड़ा हरने वाली हे नारायणी देवी — आपको नमस्कार।
✦ फलश्रुति — Phala Shruti ✦
पूजान्ते यो पठेन्नित्यं चमापन-स्तोत्रमुत्तमम्।
तस्य सर्वत्र सिद्धिः स्यात् देव्याः प्रसादतः॥
जो पूजा के अंत में नित्य इस उत्तम चमापन स्तोत्र का पाठ करता है, देवी की कृपा से उसे सर्वत्र सिद्धि प्राप्त होती है।

⚡ दुर्गा चमापन स्तोत्रम् — परिचय एवं महत्व

चमापन स्तोत्र (क्षमापन) माँ दुर्गे की पूजा के अंत में पढ़ा जाता है। इसमें भक्त अपनी अज्ञानता, त्रुटियों और अपराधों के लिए देवी से क्षमा माँगता है। यह स्तोत्र पूजन को पूर्ण और शुद्ध बनाता है।

इसमें तीन भाग हैं — (१) मूल मंत्र जप, (२) यंत्र-पूजन, और (३) चाँजने स्तुति कथा। तीनों मिलकर सम्पूर्ण साधना बनाते हैं।

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यंत्र पूजनश्री दुर्गा यंत्र को तांबे की थाली पर लिखकर लाल पुष्पों से पूजें। नवरात्रि में इसकी स्थापना विशेष फलदायी है।
मूल मंत्र'ॐ दुं दुर्गायै नमः' का १०८ बार जप सबसे सरल और प्रभावशाली साधना है।
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चाँजने स्तुतिपूजन के अंत में चाँजने श्लोकों का पाठ करने से पूजन की सभी त्रुटियाँ क्षम्य हो जाती हैं।
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नवरात्रिनौ दिनों तक प्रतिदिन यंत्र, मंत्र और चमापन स्तोत्र का पाठ करने से माँ की पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।
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