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✦ संतोषी माता • शुक्रवार व्रत ✦

Santoshi Mata Aarti

संतोषी माता आरती
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संतोषी माता — जो अपने भक्तों को सुख, संतोष और समृद्धि देती हैं। शुक्रवार को उनका व्रत करने और यह आरती गाने से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

सम्पूर्ण आरती • व्रत कथा • शुक्रवार विधि
जय संतोषी माता, जय संतोषी माता
जय संतोषी माता, जय संतोषी माता💚 अपने सेवकजन की सुख संपत दाता💚 सुनो माता मेरी अरजी💚 ऊँचे बैठी तुम दिव्य पर्वत पर💚 जय माता दी💚 जय संतोषी माता, जय संतोषी माता💚 अपने सेवकजन की सुख संपत दाता💚 सुनो माता मेरी अरजी💚 ऊँचे बैठी तुम दिव्य पर्वत पर💚 जय माता दी💚
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✦ संतोषी माता आरती — सम्पूर्ण पाठ ✦
✦ आरती — मुख्य पद ✦
जय संतोषी माता, जय संतोषी माता।
अपने सेवकजन की सुख संपत दाता॥
हे संतोषी माता की जय हो! आप अपने सेवकों को सुख और सम्पदा देने वाली हैं।
॥ पद १ ॥
माँ का स्वरूप
सुन्दर चीर सुनहरी माता, ओढे हुए सुहाती।
हीरा पन्ना नग से जड़ी माँ, मुकुट शीश सज जाती॥
जय संतोषी माता, जय संतोषी माता।
अपने सेवकजन की सुख संपत दाता॥
माँ ने सुन्दर सुनहरा वस्त्र ओढ़ रखा है जो उन्हें अत्यंत सुहावना लगता है। हीरे-पन्ने और नगों से जड़ा मुकुट उनके मस्तक पर सुशोभित है।
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॥ पद २ ॥
भक्तों की पुकार
सोने का सिंहासन बैठी, चँवर डुलाए।
धूप दीप नैवेद्य आरती, भक्त मिलाए॥
जय संतोषी माता, जय संतोषी माता।
अपने सेवकजन की सुख संपत दाता॥
माँ सोने के सिंहासन पर बैठी हैं और चँवर डुलाया जा रहा है। भक्त धूप, दीप, नैवेद्य और आरती से उन्हें प्रसन्न कर रहे हैं।
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॥ पद ३ ॥
माँ की शक्ति
सन्तोष का पाठ पढ़ाए माता, संसार को सुख दे।
भूखे को अन्न देती माता, दीन-दुखी को सुख दे॥
जय संतोषी माता, जय संतोषी माता।
अपने सेवकजन की सुख संपत दाता॥
माँ संसार को संतोष का पाठ पढ़ाती हैं और सुख देती हैं। भूखे को अन्न और दीन-दुखियों को सुख प्रदान करती हैं।
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॥ पद ४ ॥
माँ का वाहन
सिंह वाहन पर सवार होके, आती माँ जगदम्बे।
दुष्टों का विनाश करे माँ, भक्तों के सब रम्बे॥
जय संतोषी माता, जय संतोषी माता।
अपने सेवकजन की सुख संपत दाता॥
माँ सिंह पर सवार होकर आती हैं — वे जगदम्बा हैं जो दुष्टों का नाश करती हैं और अपने भक्तों की सभी आकांक्षाएँ पूर्ण करती हैं।
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॥ पद ५ ॥
व्रत महिमा
शुक्रवार जो व्रत करे, चित्त में ध्यान लगाए।
माँ संतोषी प्रसन्न होकर, मनोरथ पूरा कराए॥
जय संतोषी माता, जय संतोषी माता।
अपने सेवकजन की सुख संपत दाता॥
जो शुक्रवार को व्रत करते हुए चित्त में माँ का ध्यान लगाता है, माँ संतोषी प्रसन्न होकर उसकी मनोकामना पूर्ण करती हैं।
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॥ पद ६ ॥
प्रसाद
गुड़-चना मीठा-मीठा माता, चरण पर चढ़ाऊँ।
भक्ति-भाव से मन में माता, आरती मैं गाऊँ॥
जय संतोषी माता, जय संतोषी माता।
अपने सेवकजन की सुख संपत दाता॥
माँ के चरणों पर मीठा गुड़-चना चढ़ाता हूँ और भक्ति-भाव से मन में माँ की आरती गाता हूँ।
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॥ पद ७ ॥
माँ की कृपा
दुख दरिद्र निकट न आए, माँ जब कृपा करे।
घर में सुख-समृद्धि भरे माँ, सब कष्ट हरे॥
जय संतोषी माता, जय संतोषी माता।
अपने सेवकजन की सुख संपत दाता॥
जब माँ कृपा करती हैं, दुख और दरिद्रता पास नहीं आती। घर में सुख-समृद्धि भर जाती है और सब कष्ट दूर होते हैं।
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॥ पद ८ ॥
अन्तिम प्रार्थना
माँ संतोषी दरश दिखाओ, भव-सागर से तारो।
दास-दासी पर कृपा बनाओ, शरण हमें स्वीकारो॥
जय संतोषी माता, जय संतोषी माता।
अपने सेवकजन की सुख संपत दाता॥
हे माँ संतोषी! दर्शन दीजिए और भव-सागर से पार कीजिए। अपने दास-दासी पर कृपा बनाए रखें और हमें शरण में स्वीकार करें।
✦ शुक्रवार व्रत कथा ✦
✦ संतोषी माता व्रत कथा ✦

एक बार एक साहूकार की सात बेटियाँ थीं। छह बड़ी बहनें माँ संतोषी का व्रत करती थीं परन्तु सबसे छोटी बेटी कभी व्रत नहीं करती थी। शुक्रवार को बड़ी बहनें माँ संतोषी को गुड़-चना का भोग लगाती थीं।

एक बार छोटी बेटी अपनी सहेलियों के साथ घूमने गई। सहेलियाँ शुक्रवार का व्रत कर रही थीं। सहेलियों ने बताया कि यह माँ संतोषी का व्रत है जो सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं।

उसी दिन से छोटी बेटी ने भी माँ संतोषी का व्रत शुरू किया। उसने सोलह शुक्रवार का व्रत किया। माँ की कृपा से उसके घर में सुख-समृद्धि आई, विवाह हुआ और सन्तान प्राप्त हुई।

व्रत की पूर्णाहुति पर उसने कथा सुनाई और गुड़-चने का प्रसाद बाँटा। माँ संतोषी प्रसन्न हुईं और उन पर सदा के लिए कृपा बरसाई। तभी से यह व्रत शुक्रवार को किया जाता है।

✦ व्रत के नियम ✦
🌿 क्या करें — शुक्रवार को उपवास रखें। माँ को गुड़-चना और फल का भोग लगाएँ। आरती और कथा सुनें या पढ़ें। सोलह शुक्रवार व्रत करने का संकल्प लें।

🚫 क्या न करें — व्रत के दिन खट्टी चीजें न खाएँ (नींबू, इमली, दही आदि)। घर में खट्टा पदार्थ न आने दें। किसी को कटु वचन न कहें।
✦ फलश्रुति — Phala Shruti ✦
सोलह शुक्रवार जो व्रत करे।
माँ संतोषी सब दुख हरे॥
घर में सुख-समृद्धि आए नित।
मनोकामना पूर्ण हो सहित॥
जो सोलह शुक्रवार का व्रत करता है, माँ संतोषी उसके सभी दुख हरती हैं। घर में सुख-समृद्धि आती है और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

💚 संतोषी माता — परिचय एवं महत्व

संतोषी माता भगवान गणेश की पुत्री मानी जाती हैं। वे संतोष और सुख की देवी हैं। उनका मुख्य पर्व शुक्रवार का व्रत है, जिसे सोलह शुक्रवार तक करने का विधान है।

उनका प्रसाद गुड़-चना है — इसमें खट्टी चीजें वर्जित हैं। उनकी भक्ति से संतान, सुख, समृद्धि और पारिवारिक शान्ति प्राप्त होती है।

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शुक्रवार व्रतसोलह शुक्रवार तक उपवास रखने और कथा सुनने से माँ प्रसन्न होती हैं।
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गुड़-चना प्रसादमाँ को गुड़ और भुने चने का भोग सबसे प्रिय है — खट्टी चीजें वर्जित हैं।
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कथा श्रवणव्रत के दिन कथा अवश्य सुनें और प्रसाद सभी में बाँटें।
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उद्यापनसोलहवें व्रत पर उद्यापन करें — ब्राह्मणों और कन्याओं को भोजन कराएँ।
SANTOSHI MATA AARTI
Shukrawar Vrat • Jai Mata Di