🌸
✦ देवी महात्म्यम् • दुर्गा सप्तशती ✦

Ya Devi Sarvabhuteshu

या देवी सर्वभूतेषु
✦ ✦ ✦

दुर्गा सप्तशती का महामंत्र — जिसमें देवी के विविध रूपों की स्तुति है और तीन बार नमस्कार। यह स्तोत्र मार्कण्डेय पुराण से लिया गया है।

देवी महात्म्यम् • मार्कण्डेय पुराण • सप्तशती
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः🌸 या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता🌸 या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता🌸 या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता🌸 या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता🌸 जय माता दी🌸 नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः🌸 या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता🌸 या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता🌸 या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता🌸 या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता🌸 जय माता दी🌸
🌸🌸 🌸🌸
✦ या देवी सर्वभूतेषु — सम्पूर्ण स्तुति ✦
✦ महावाक्य — मूल मंत्र ✦
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
जो देवी समस्त प्राणियों में शक्ति-रूप से विराजमान हैं — उन्हें नमस्कार, नमस्कार, नमस्कार। बारंबार नमन।
॥ श्लोक १ ॥
शक्तिरूपा देवी
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
जो देवी समस्त प्राणियों में शक्ति के रूप में स्थित हैं — उन्हें तीन बार नमस्कार और पुनः नमन।
~ 🌸 ~
॥ श्लोक २ ॥
बुद्धिरूपा देवी
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
जो देवी समस्त प्राणियों में बुद्धि के रूप में स्थित हैं — उन्हें तीन बार नमस्कार और पुनः नमन।
~ 🌸 ~
॥ श्लोक ३ ॥
निद्रारूपा देवी
या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
जो देवी समस्त प्राणियों में निद्रा के रूप में स्थित हैं — उन्हें तीन बार नमस्कार और पुनः नमन।
~ 🌸 ~
॥ श्लोक ४ ॥
क्षुधारूपा देवी
या देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
जो देवी समस्त प्राणियों में भूख (क्षुधा) के रूप में स्थित हैं — उन्हें तीन बार नमस्कार और पुनः नमन।
~ 🌸 ~
॥ श्लोक ५ ॥
छायारूपा देवी
या देवी सर्वभूतेषु छायारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
जो देवी समस्त प्राणियों में छाया के रूप में स्थित हैं — उन्हें तीन बार नमस्कार और पुनः नमन।
~ 🌸 ~
॥ श्लोक ६ ॥
तृष्णारूपा देवी
या देवी सर्वभूतेषु तृष्णारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
जो देवी समस्त प्राणियों में तृष्णा (प्यास / इच्छा) के रूप में स्थित हैं — उन्हें तीन बार नमस्कार और पुनः नमन।
~ 🌸 ~
॥ श्लोक ७ ॥
क्षान्तिरूपा देवी
या देवी सर्वभूतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
जो देवी समस्त प्राणियों में क्षमा (क्षान्ति) के रूप में स्थित हैं — उन्हें तीन बार नमस्कार और पुनः नमन।
~ 🌸 ~
॥ श्लोक ८ ॥
जातिरूपा देवी
या देवी सर्वभूतेषु जातिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
जो देवी समस्त प्राणियों में जाति (वंश/कुल-भाव) के रूप में स्थित हैं — उन्हें तीन बार नमस्कार और पुनः नमन।
~ 🌸 ~
॥ श्लोक ९ ॥
लज्जारूपा देवी
या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
जो देवी समस्त प्राणियों में लज्जा (शर्म/विनम्रता) के रूप में स्थित हैं — उन्हें तीन बार नमस्कार और पुनः नमन।
~ 🌸 ~
॥ श्लोक १० ॥
शान्तिरूपा देवी
या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
जो देवी समस्त प्राणियों में शान्ति के रूप में स्थित हैं — उन्हें तीन बार नमस्कार और पुनः नमन।
~ 🌸 ~
॥ श्लोक ११ ॥
श्रद्धारूपा देवी
या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
जो देवी समस्त प्राणियों में श्रद्धा के रूप में स्थित हैं — उन्हें तीन बार नमस्कार और पुनः नमन।
~ 🌸 ~
॥ श्लोक १२ ॥
कान्तिरूपा देवी
या देवी सर्वभूतेषु कान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
जो देवी समस्त प्राणियों में कान्ति (आभा/तेज) के रूप में स्थित हैं — उन्हें तीन बार नमस्कार और पुनः नमन।
~ 🌸 ~
॥ श्लोक १३ ॥
लक्ष्मीरूपा देवी
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
जो देवी समस्त प्राणियों में लक्ष्मी (सम्पदा/समृद्धि) के रूप में स्थित हैं — उन्हें तीन बार नमस्कार और पुनः नमन।
~ 🌸 ~
॥ श्लोक १४ ॥
वृत्तिरूपा देवी
या देवी सर्वभूतेषु वृत्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
जो देवी समस्त प्राणियों में वृत्ति (चित्त-वृत्ति/स्वभाव) के रूप में स्थित हैं — उन्हें तीन बार नमस्कार और पुनः नमन।
~ 🌸 ~
॥ श्लोक १५ ॥
स्मृतिरूपा देवी
या देवी सर्वभूतेषु स्मृतिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
जो देवी समस्त प्राणियों में स्मृति (याद/स्मरण-शक्ति) के रूप में स्थित हैं — उन्हें तीन बार नमस्कार और पुनः नमन।
~ 🌸 ~
॥ श्लोक १६ ॥
दयारूपा देवी
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
जो देवी समस्त प्राणियों में दया के रूप में स्थित हैं — उन्हें तीन बार नमस्कार और पुनः नमन।
~ 🌸 ~
॥ श्लोक १७ ॥
तुष्टिरूपा देवी
या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
जो देवी समस्त प्राणियों में तुष्टि (संतोष) के रूप में स्थित हैं — उन्हें तीन बार नमस्कार और पुनः नमन।
~ 🌸 ~
॥ श्लोक १८ ॥
मातृरूपा देवी
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
जो देवी समस्त प्राणियों में माँ (मातृत्व) के रूप में स्थित हैं — उन्हें तीन बार नमस्कार और पुनः नमन।
~ 🌸 ~
॥ श्लोक १९ ॥
भ्रान्तिरूपा देवी
या देवी सर्वभूतेषु भ्रान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
जो देवी समस्त प्राणियों में भ्रान्ति (मोह/भ्रम) के रूप में स्थित हैं — उन्हें तीन बार नमस्कार और पुनः नमन।
~ 🌸 ~
✦ समापन श्लोक ✦
॥ समापन ॥
इन्द्रियाणि अधिष्ठात्री
इन्द्रियाणामधिष्ठात्री भूतानां चाखिलेषु या।
भूतेषु सततं तस्यै व्याप्तिदेव्यै नमो नमः॥

चितिरूपेण या कृत्स्नमेतद्व्याप्य स्थिता जगत्।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
जो देवी समस्त इन्द्रियों की अधिष्ठात्री हैं और समस्त भूतों में नित्य व्याप्त हैं — उस व्यापिनी देवी को बारंबार नमस्कार। जो चिति-रूपेण इस सम्पूर्ण जगत को व्याप्त करके स्थित हैं — उन्हें नमस्कार, नमस्कार, नमस्कार।
✦ फलश्रुति — Phala Shruti ✦
या देवी स्तुति जो पढ़े नित्य।
देवी कृपा मिले उसे प्रतित्य॥
भय, रोग, दुख दूर हों सारे।
देवी रक्षे भक्त को प्यारे॥
जो प्रतिदिन इस देवी स्तुति का पाठ करते हैं, उन पर देवी की कृपा होती है। उनके भय, रोग और दुख सभी दूर होते हैं — देवी अपने प्रिय भक्त की रक्षा करती हैं।

🌸 या देवी सर्वभूतेषु — परिचय एवं महत्व

यह महामंत्र देवी महात्म्यम् (दुर्गा सप्तशती) के पाँचवें अध्याय से लिया गया है। इसमें देवी के उन्नीस विभिन्न रूपों — शक्ति, बुद्धि, निद्रा, क्षुधा, छाया, तृष्णा, क्षान्ति, जाति, लज्जा, शान्ति, श्रद्धा, कान्ति, लक्ष्मी, वृत्ति, स्मृति, दया, तुष्टि, मातृत्व और भ्रान्ति — की स्तुति है।

प्रत्येक रूप के लिए तीन बार 'नमस्तस्यै' कहने का गहरा आध्यात्मिक अर्थ है — मन, वाणी और कर्म तीनों से नमन।

🌸
सप्तशती पाठनवरात्रि में दुर्गा सप्तशती के पाठ में यह स्तुति पाँचवें अध्याय के आरम्भ में आती है।
🔱
उन्नीस रूपदेवी के उन्नीस विभिन्न रूपों की इस स्तुति में हर रूप के लिए तीन बार नमस्कार किया जाता है।
📿
नित्य जपप्रतिदिन इस स्तुति का पाठ करने से देवी की कृपा, शान्ति और समृद्धि प्राप्त होती है।
🌙
नवरात्रि विशेषनवरात्रि के नौ दिनों में प्रातः और सायं इस स्तुति का पाठ अत्यंत फलदायी है।
Logo
YA DEVI SARVABHUTESHU
Devi Stuti • Saptashati