परिचय — About this Aarti
यह आरती भगवान गणेश की सबसे प्रचलित और लोकप्रिय आरती है। प्रत्येक गणेश पूजा, गणेशोत्सव और मंगलकार्य में इसका गायन किया जाता है। इसकी रचना संत कवियों ने की है। "माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा" — यह पंक्ति गणेश के दिव्य परिवार का स्मरण कराती है।
सम्पूर्ण आरती — Complete Aarti
टेक (Refrain — बार बार गाएं)
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अर्थ: हे गणेश देव! आपकी जय हो। जिनकी माता पार्वती हैं और पिता महादेव (शिव) हैं, उन गणेश देव की जय हो।
पद १
एकदन्त दयावन्त, चार भुजाधारी।
माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अर्थ: एक दाँत वाले, दयालु, चार भुजाधारी गणेश के मस्तक पर तिलक सुशोभित है और उनका वाहन मूषक (चूहा) है।
पद २
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अर्थ: पान, फल और मेवे चढ़ाए जाते हैं। लड्डुओं का भोग लगाया जाता है और सन्तजन आपकी सेवा करते हैं।
पद ३
अन्धन को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अर्थ: अंधों को आँखें देते हैं, कोढ़ियों को स्वस्थ शरीर देते हैं, निःसन्तान को पुत्र देते हैं और निर्धन को धन-सम्पत्ति देते हैं।
पद ४
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अर्थ: हे गणेश! 'सूर' श्याम आपकी शरण में आए हैं — इनकी सेवा और भक्ति को सफल कीजिए।
आरती विधि — Aarti Method
आरती करने की विधि
- गणेश पूजा के अंत में आरती की जाती है। दीपक या कपूर जलाएं।
- थाली में दीपक, पुष्प, धूप और नारियल रखें।
- घड़ी की दिशा में दीपक को गणेश की मूर्ति के सामने गोल घुमाएं।
- आरती गाते समय घण्टी बजाएं — इससे वातावरण पवित्र होता है।
- आरती के बाद प्रसाद (लड्डू / मोदक) वितरित करें।
- संकष्टी चतुर्थी और बुधवार को आरती का विशेष महत्त्व है।