✦ आदि शंकराचार्य विरचितम् ✦

Dwadasha Jyotirlinga Stotram

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम्
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भारत की पुण्यभूमि पर विराजमान बारह ज्योतिर्लिंगों की महिमा — जहाँ शिव स्वयं ज्योति के रूप में प्रकट हैं। इस दिव्य स्तोत्र का पाठ करने से समस्त तीर्थों का पुण्य प्राप्त होता है।

रचयिता : आदि शंकराचार्य • ४ श्लोक + फलश्रुति • १२ ज्योतिर्लिंग
सौराष्ट्रे सोमनाथं च — एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि
१. सोमनाथ
२. मल्लिकार्जुन
३. महाकालेश्वर
४. ओंकारेश्वर
५. केदारनाथ
६. भीमशंकर
७. विश्वनाथ
८. त्र्यम्बकेश्वर
९. वैद्यनाथ
१०. नागेश्वर
११. रामेश्वर
१२. घृष्णेश्वर
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम् उज्जयिन्यां महाकालम् ओम्कारममलेश्वरम् परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशंकरम् सेतुबन्धे तु रामेशम् नागेशं दारुकावने वाराणस्यां तु विश्वेशम् त्र्यम्बकं गौतमीतटे हिमालये तु केदारम् घुश्मेशं च शिवालये सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम् उज्जयिन्यां महाकालम् ओम्कारममलेश्वरम् परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशंकरम् सेतुबन्धे तु रामेशम् नागेशं दारुकावने वाराणस्यां तु विश्वेशम् त्र्यम्बकं गौतमीतटे हिमालये तु केदारम् घुश्मेशं च शिवालये
✦ द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम् — सम्पूर्ण ४ श्लोक ✦
॥ श्लोक १ ॥
सोमनाथ से महाकाल तक
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालमोम्कारममलेश्वरम्॥
Saurāṣṭre Somnāthaṃ ca Śrīśaile Mallikārjunam | Ujjayinyāṃ Mahākālam Omkāram-amaleSvaram
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि
सौराष्ट्र (गुजरात) में सोमनाथ, श्रीशैल (आंध्र प्रदेश) में मल्लिकार्जुन, उज्जयिनी (मध्य प्रदेश) में महाकाल, और ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश) में अमलेश्वर — ये चार ज्योतिर्लिंग पूजनीय हैं।
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॥ श्लोक २ ॥
केदार से नागेश्वर तक
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशंकरम्।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥
Paralyāṃ Vaidyanāthaṃ ca Ḍākinyāṃ Bhīmaśaṃkaram | Setubandhe tu Rāmeśaṃ Nāgeśaṃ Dārukāvane
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि
परली (महाराष्ट्र) में वैद्यनाथ, डाकिनी (महाराष्ट्र) में भीमशंकर, सेतुबंध (तमिलनाडु) में रामेश्वरम्, और दारुकावन (द्वारका) में नागेश्वर — ये चार ज्योतिर्लिंग हैं।
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॥ श्लोक ३ ॥
विश्वनाथ से घृष्णेश्वर तक
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।
हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥
Vārāṇasyāṃ tu Viśveśaṃ Tryambakaṃ Gautamītaṭe | Himālaye tu Kedāraṃ Ghuśmeśaṃ ca Śivālaye
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि
वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में विश्वेश्वर, गोदावरी तट (महाराष्ट्र) पर त्र्यम्बकेश्वर, हिमालय में केदारनाथ (उत्तराखंड), और शिवालय (महाराष्ट्र) में घुश्मेश्वर — ये चार ज्योतिर्लिंग हैं।
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॥ श्लोक ४ ॥
पाठ का फल — सभी तीर्थों का पुण्य
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥
Etāni Jyotirliṅgāni Sāyaṃ Prātaḥ Paṭhen-Naraḥ | Sapta-Janma-Kṛtaṃ Pāpaṃ Smaraṇena Vinaśyati
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि
जो मनुष्य इन ज्योतिर्लिंगों के नामों का सायं (शाम) और प्रातः (सुबह) पाठ करता है — उसके सात जन्मों के पाप केवल स्मरण मात्र से नष्ट हो जाते हैं।
~ ✨ द्वादश ज्योतिर्लिंग ✨ ~
ज्योतिर्लिंग १
🌊
सोमनाथ
SOMNATH
सौराष्ट्र तट, प्रभास क्षेत्र
गुजरात
ज्योतिर्लिंग २
⛰️
मल्लिकार्जुन
MALLIKARJUNA
श्रीशैल पर्वत
आंध्र प्रदेश
ज्योतिर्लिंग ३
महाकालेश्वर
MAHAKALESHWAR
उज्जयिनी, शिप्रा तट
मध्य प्रदेश
ज्योतिर्लिंग ४
🕉️
ओंकारेश्वर
OMKARESHWAR
मान्धाता द्वीप, नर्मदा
मध्य प्रदेश
ज्योतिर्लिंग ५
🏔️
केदारनाथ
KEDARNATH
हिमालय, मंदाकिनी तट
उत्तराखंड
ज्योतिर्लिंग ६
🌿
भीमशंकर
BHIMASHANKAR
डाकिनी, सह्याद्रि पर्वत
महाराष्ट्र
ज्योतिर्लिंग ७
🙏
काशी विश्वनाथ
KASHI VISHWANATH
वाराणसी, गंगा तट
उत्तर प्रदेश
ज्योतिर्लिंग ८
🌊
त्र्यम्बकेश्वर
TRIMBAKESHWAR
गोदावरी उद्गम, नासिक
महाराष्ट्र
ज्योतिर्लिंग ९
⚕️
वैद्यनाथ
VAIDYANATH
परली / देवघर
महाराष्ट्र / झारखंड
ज्योतिर्लिंग १०
🐍
नागेश्वर
NAGESHWAR
दारुकावन, द्वारका
गुजरात
ज्योतिर्लिंग ११
🌅
रामेश्वरम्
RAMESHWARAM
सेतुबंध, पम्बन द्वीप
तमिलनाडु
ज्योतिर्लिंग १२
घृष्णेश्वर
GRISHNESHWAR
वेरुल, एलोरा के निकट
महाराष्ट्र
✦ फलश्रुति — Phala Shruti ✦
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥
एतेषां दर्शनादेव पातकं नाशमेति च।
ज्योतिर्लिङ्ग सहस्राणां पठनात् फलमाप्नुयात्॥
Etāni Jyotirliṅgāni Sāyaṃ Prātaḥ Paṭhen-naraḥ | Sapta-Janma-Kṛtaṃ Pāpaṃ Smaraṇena Vinaśyati
जो प्रातः और सायं इन द्वादश ज्योतिर्लिंगों का स्मरण करता है — उसके सात जन्मों के पाप नष्ट होते हैं। इनके दर्शन मात्र से पातक का नाश होता है। यह स्तोत्र हजारों ज्योतिर्लिंगों के पाठ के समान फल देता है।

✨ द्वादश ज्योतिर्लिंग — शिव के बारह स्वरूप

ज्योतिर्लिंग वे स्थान हैं जहाँ शिव स्वयं अनंत प्रकाश-स्तम्भ के रूप में प्रकट हुए। पुराणों के अनुसार, ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता के विवाद को समाप्त करने के लिए शिव एक अनंत ज्योति-स्तम्भ के रूप में प्रकट हुए जिसका आदि और अंत किसी को नहीं मिला।

भारत में बारह प्रमुख स्थानों पर यह ज्योतिर्लिंग विराजमान हैं — उत्तर में केदारनाथ से लेकर दक्षिण में रामेश्वरम् तक, पश्चिम में सोमनाथ से लेकर पूर्व में वैद्यनाथ तक। इस दिव्य स्तोत्र का पाठ इन सभी तीर्थों की यात्रा के समान पुण्यदायी है।

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ज्योति का अर्थज्योतिर्लिंग में "ज्योति" का अर्थ है दिव्य प्रकाश — शिव का अनंत, अनादि, अनाश्वर स्वरूप जो अंधकार को नष्ट करता है।
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भारत की परिक्रमाये बारह ज्योतिर्लिंग भारत के उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम — चारों दिशाओं में स्थित हैं, जो भारत की एकता का प्रतीक हैं।
सात जन्मों का पुण्यइस स्तोत्र का नित्य पाठ करने से सात जन्मों के संचित पाप नष्ट होते हैं — यह फलश्रुति स्वयं शंकराचार्य ने दी है।
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शंकराचार्य का योगदानआदि शंकराचार्य ने स्वयं इन बारह ज्योतिर्लिंग तीर्थों की यात्रा की और भारत भर में चार मठों की स्थापना की।
✨ भक्तों के विचार

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12 Jyotirlinga • Adi Shankaracharya