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✦ आदि शंकराचार्य विरचितम् ✦

Panchakshara Stotram

शिव पञ्चाक्षर स्तोत्रम्
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पाँच पवित्र अक्षरों — न, म, शि, वा, य — की महिमा का दिव्य वर्णन। प्रत्येक अक्षर एक तत्व, एक दिशा और शिव के एक रूप का प्रतीक है। यही सृष्टि का मूल मंत्र है — ॐ नमः शिवाय।

रचयिता : आदि शंकराचार्य • ५ श्लोक + फलश्रुति
नमः शिवाय च नमः शिवाय च
पृथ्वी
जल
शिअग्नि
वावायु
आकाश
🌍 Na — Earth पृथ्वी तत्व
💧 Ma — Water जल तत्व
🔥 शि Shi — Fire अग्नि तत्व
💨 वा Va — Air वायु तत्व
Ya — Ether आकाश तत्व
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय✴️ भस्मांगरागाय महेश्वराय✴️ नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय✴️ तस्मै न काराय नमः शिवाय✴️ मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय✴️ ॐ नमः शिवाय✴️ नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय✴️ भस्मांगरागाय महेश्वराय✴️ नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय✴️ तस्मै न काराय नमः शिवाय✴️ मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय✴️ ॐ नमः शिवाय✴️
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✦ शिव पञ्चाक्षर स्तोत्रम् — सम्पूर्ण ५ श्लोक ✦
॥ श्लोक १ ॥
नागेन्द्रहार — पृथ्वी तत्व
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय
भस्मांगरागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय
तस्मै न काराय नमः शिवाय॥
Nāgendra-Hārāya Trilocanāya | Bhasmāṅga-Rāgāya Maheśvarāya | Nityāya Śuddhāya Digambarāya | Tasmai Na-Kārāya Namaḥ Śivāya
🌍 पृथ्वी तत्व • भूमि • न-कार
तस्मै न काराय नमः शिवाय
नागराज की माला धारण करने वाले, तीन नेत्रों वाले, जिनके अंग भस्म से अनुरंजित हैं — उन महेश्वर को, जो नित्य हैं, शुद्ध हैं, दिगम्बर (आकाश-वस्त्र धारी) हैं — उन न-कार (पृथ्वी तत्व) के स्वरूप शिव को नमः शिवाय।
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॥ श्लोक २ ॥
मन्दाकिनी — जल तत्व
मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय
नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय।
मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय
तस्मै म काराय नमः शिवाय॥
Mandākinī-Salila-Candana-Carcitāya | Nandiśvara-Pramatha-Nātha-Maheśvarāya | Mandāra-Puṣpa-Bahu-Puṣpa-Supūjitāya | Tasmai Ma-Kārāya Namaḥ Śivāya
💧 जल तत्व • जल • म-कार
तस्मै म काराय नमः शिवाय
मन्दाकिनी (गंगा) के जल और चंदन से अभिषिक्त, नंदीश्वर और प्रमथों के स्वामी महेश्वर, जो मन्दार और अनेकानेक पुष्पों से भली-भाँति पूजित हैं — उन म-कार (जल तत्व) के स्वरूप शिव को नमः शिवाय।
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॥ श्लोक ३ ॥
शि
शिवाय — अग्नि तत्व
शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द
सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय।
श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय
तस्मै शि काराय नमः शिवाय॥
Śivāya Gaurī-Vadana-Abja-Vṛnda-Sūryāya | Dakṣa-Adhvara-Nāśakāya | Śrī-Nīlakaṇṭhāya Vṛṣa-Dhvajāya | Tasmai Śi-Kārāya Namaḥ Śivāya
🔥 अग्नि तत्व • अग्नि • शि-कार
तस्मै शि काराय नमः शिवाय
जो देवी गौरी के मुखारविन्द के लिए सूर्य-समान हैं, जिन्होंने दक्ष के यज्ञ का नाश किया, जो श्रीनीलकंठ (विष पान करने वाले) और वृषभ-ध्वज (नंदी के ध्वज वाले) हैं — उन शि-कार (अग्नि तत्व) के स्वरूप शिव को नमः शिवाय।
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॥ श्लोक ४ ॥
वा
वसिष्ठ-स्तुत — वायु तत्व
वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य
मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय।
चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय
तस्मै व काराय नमः शिवाय॥
Vasiṣṭha-Kumbhodbhava-Gautama-Ārya-Munīndra-Devārcita-Śekharāya | Candra-Arka-Vaiśvānara-Locanāya | Tasmai Va-Kārāya Namaḥ Śivāya
💨 वायु तत्व • वायु • व-कार
तस्मै व काराय नमः शिवाय
जिनकी वसिष्ठ, अगस्त्य (कुम्भोद्भव), गौतम और श्रेष्ठ मुनियों तथा देवताओं ने मस्तक पर पूजा की है, जिनके नेत्र चन्द्र, सूर्य और अग्नि हैं — उन व-कार (वायु तत्व) के स्वरूप शिव को नमः शिवाय।
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॥ श्लोक ५ ॥
यज्ञस्वरूप — आकाश तत्व
यज्ञस्वरूपाय जटाधराय
पिनाकहस्ताय सनातनाय।
दिव्याय देवाय दिगम्बराय
तस्मै य काराय नमः शिवाय॥
Yajña-Svarūpāya Jaṭā-Dharāya | Pināka-Hastāya Sanātanāya | Divyāya Devāya Digambarāya | Tasmai Ya-Kārāya Namaḥ Śivāya
✨ आकाश तत्व • व्योम • य-कार
तस्मै य काराय नमः शिवाय
जो यज्ञ स्वरूप हैं, जटाधारी हैं, पिनाक (धनुष) को हाथ में धारण करते हैं, जो सनातन हैं — दिव्य, देव, दिगम्बर — उन य-कार (आकाश तत्व) के स्वरूप शिव को नमः शिवाय।
✦ फलश्रुति — Phala Shruti ✦
पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥
Pañcākṣaram-idaṃ puṇyaṃ yaḥ paṭhec-chiva-sannidhau | Śivalokam-avāpnoti Śivena saha modate
जो कोई इस पवित्र पञ्चाक्षर स्तोत्र का पाठ शिव की उपस्थिति में करता है — वह शिवलोक को प्राप्त करता है और भगवान शिव के साथ दिव्य आनंद को भोगता है। "नमः शिवाय" के पाँच अक्षर ही मुक्ति के द्वार हैं।

🕉️ शिव पञ्चाक्षर स्तोत्रम् — पाँच अक्षरों का रहस्य

"ॐ नमः शिवाय" — यह षडाक्षर मंत्र है, किंतु इसमें "ॐ" को अलग करने के बाद शेष पाँच अक्षर — न, म, शि, वा, य — ही "पञ्चाक्षर" कहलाते हैं। इन पाँचों अक्षरों में पाँच तत्वों (पंच-महाभूत), पाँच दिशाओं और शिव के पाँच मुखों की महिमा समाहित है।

आदि शंकराचार्य ने इस स्तोत्र में प्रत्येक श्लोक को एक अक्षर को समर्पित किया — न-कार, म-कार, शि-कार, व-कार और य-कार — और प्रत्येक में शिव के उस अक्षर से जुड़े रूप का वर्णन किया है।

🌍
न — पृथ्वी तत्व (नागेन्द्रहार)नाग-माला और भस्म-शरीर — शिव पृथ्वी के धारक हैं। न-कार पृथ्वी और स्थिरता का प्रतीक है।
💧
म — जल तत्व (मन्दाकिनी)गंगाजल और चंदन से अभिषिक्त — म-कार जल, प्रवाह और पोषण का प्रतीक है।
🔥
शि — अग्नि तत्व (नीलकंठ)विष और ज्वाला को धारण करने वाले — शि-कार अग्नि, तेज और परिवर्तन का प्रतीक है।
💨
व — वायु तत्व (त्रिलोचन)तीन नेत्र — सूर्य, चन्द्र और अग्नि — व-कार वायु, गति और प्राण का प्रतीक है।
य — आकाश तत्व (यज्ञस्वरूप)सनातन और दिव्य — य-कार आकाश, अनंतता और ब्रह्म का प्रतीक है।
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