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✦ हर हर महादेव — सम्पूर्ण भजन ✦
✦ मुखड़ा — हर बार दोहराएँ ✦
हर हर महादेव, बम बम भोले।
जय जय शम्भो, नीलकंठ देव॥
बोलो हर हर हर महादेव।
✦ अंतरा १ — शिव का स्वरूप ✦
॥ अंतरा १ ॥
जटा में गंगा, माथे चंद्र
जटा में गंगा, माथे चंद्रमा सोहे।
तन भस्म लगाए, नयन तीन मोहे।
डमरू बजाए, त्रिशूल धारी।
भोले भंडारी, भव-दुख-हारी॥
हर हर महादेव, बम बम भोले।
जटाओं में गंगा और माथे पर चंद्रमा सुशोभित है। शरीर पर भस्म लगाए, तीन नेत्रों वाले शिव मन मोह लेते हैं। डमरू बजाते, त्रिशूल धारी — भोले भंडारी भव-दुख हरने वाले हैं।
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✦ अंतरा २ — कैलाश-निवासी ✦
॥ अंतरा २ ॥
कैलाश — शिव का धाम
कैलाश पे बैठे, गणों संग खेले।
नंदी संग झूमे, भवानी संग मेले।
पार्वती की प्रीति, शिव की रीति।
अर्धनारी ईश्वर, जग की नीति॥
हर हर महादेव, बम बम भोले।
कैलाश पर विराजकर गणों के साथ खेलते हैं, नंदी संग झूमते हैं, भवानी के साथ उत्सव मनाते हैं। पार्वती की प्रीति और शिव की रीति — अर्धनारीश्वर — यही जगत् की नीति है।
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✦ अंतरा ३ — नीलकंठ की कथा ✦
॥ अंतरा ३ ॥
नीलकंठ — विष-पान की महिमा
सागर मंथन में, जब विष उठा भारी।
देव-दानव सब मिल, भए बेकारी।
तब नीलकंठ ने, विष को पिया।
जग को बचाकर, उपकार किया॥
हर हर महादेव, बम बम भोले।
समुद्र-मंथन में जब भारी विष निकला, देव और दानव सब व्याकुल हो गए। तब नीलकंठ ने स्वयं विष पीकर संसार को बचाया — यह परम उपकार था।
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✦ अंतरा ४ — भोले का भाव ✦
॥ अंतरा ४ ॥
भोलेनाथ — सरल भक्ति से प्रसन्न
एक बेल-पत्र से, भोले प्रसन्न होते।
जल की धार से, पाप सब धोते।
न चाहिए सोना, न चाहिए रत्न।
सच्चे भाव से, मिलते भव-तारण॥
हर हर महादेव, बम बम भोले।
एक बेल-पत्र से ही भोलेनाथ प्रसन्न हो जाते हैं, जल की धार से पाप धुल जाते हैं। सोना-रत्न नहीं चाहिए — सच्चे भाव से भव-सागर के तारक मिल जाते हैं।
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✦ अंतरा ५ — तांडव नृत्य ✦
॥ अंतरा ५ ॥
नटराज — सृष्टि का नृत्य
नटराज की मुद्रा, ब्रह्माण्ड थरथराए।
तांडव के ताल पर, सृष्टि नाच जाए।
सृष्टि भी उनकी, संहार भी उनका।
हर-हर में समाया, सारा जहाँ उनका॥
हर हर महादेव, बम बम भोले।
नटराज की मुद्रा से ब्रह्माण्ड थरथरा जाता है, तांडव की ताल पर सम्पूर्ण सृष्टि नाचने लगती है। सृष्टि भी उन्हीं की, संहार भी उन्हीं का — "हर हर" में सारा जहाँ समाया है।
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✦ अंतरा ६ — भक्त की पुकार ✦
॥ अंतरा ६ ॥
भक्त — शिव की शरण में
दीन हूँ, हीन हूँ, तेरे द्वार आया।
भोले भंडारी, तेरी शरण में आया।
कर दो उद्धार, महादेव मेरे।
जीवन-नैया, लग जाए तेरे॥
हर हर महादेव, बम बम भोले।
मैं दीन-हीन होकर तेरे द्वार आया हूँ, हे भोले भंडारी — तेरी शरण में आया हूँ। मेरा उद्धार करो, हे महादेव — मेरी जीवन-नैया तेरे किनारे लग जाए।
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✦ अंतरा ७ — ॐकार का नाद ✦
॥ अंतरा ७ ॥
ॐकार — शिव की सर्वोच्च महिमा
ॐकार में रहते, ॐकार में खोते।
शिव-शिव शिव-शिव, जप में रोते।
ब्रह्म-विष्णु-महेश एक ही सत्य।
हर-हर के नाद में, मिले परम तत्व॥
हर हर महादेव, बम बम भोले।
ॐकार में निवास करते हैं, ॐकार में ही खो जाते हैं। शिव-शिव जप में भक्त आँसुओं से भर जाते हैं। ब्रह्मा-विष्णु-महेश एक ही सत्य हैं — "हर हर" के नाद में परम तत्व की प्राप्ति होती है।
✦ समापन मुखड़ा ✦
हर हर महादेव, बम बम भोले।
जय जय शम्भो, नीलकंठ देव॥
बोलो हर हर, बोलो हर हर।
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय॥
🎵 भजन — भक्ति का संगीत-रूप
भजन शब्द की उत्पत्ति "भज्" धातु से है — अर्थात् सेवा करना, ध्यान करना, भक्ति करना। भजन वह विधा है जहाँ भक्ति और संगीत का अभेद्य मिलन होता है। "हर हर महादेव" — यह केवल गीत नहीं, यह एक नाद-साधना है।
"हर" शब्द का अर्थ है — हरण करने वाला। शिव हमारे पाप, दुःख, अज्ञान सब "हर" लेते हैं। "हर हर" — दो बार कहने से भाव दोगुना हो जाता है। "बम बम" — शिव का बीज-स्वरूप, डमरू का नाद।
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हर — नाम का अर्थ"हर" = हरण करने वाले। शिव हमारे समस्त दुःखों, पापों और बंधनों को "हर" लेते हैं। "हर हर" — दोहराव में आनंद और शक्ति दोनों बढ़ते हैं।
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बम बम — डमरू-नाद"बम" शिव का बीज-मंत्र है — डमरू की आवाज़। यह प्रणव ॐ का एक स्वरूप है। "बम बम भोले" में भक्त शिव को उनके ही नाद से पुकारता है।
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नीलकंठ देवनीलकंठ — नीले कंठ वाले शिव। विष-पान के बाद कंठ नीला पड़ गया — यह नाम शिव की परोपकारी करुणा का प्रतीक है। देव-जगत् की रक्षा का सबूत।
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भजन की शक्तिभजन में जब स्वर, लय और भाव एक हो जाते हैं — तब भक्त और भगवान के बीच की दूरी मिट जाती है। "हर हर महादेव" इसीलिए हर युग में गाया जाता है।
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