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✦ शंकर संकट हरना — सम्पूर्ण भजन बोल ✦
॥ मुखड़ा ॥
Mukhda — Opening Verse
तेरा था डेरा, भोले, चार दिशा में
धरती, अम्बर, हे, जग तेरा ओ, भोले बाबा
चंदा, सूरज और मैं तेरा ओ
शिव कैलाशों के वासी
धौड़ी, धारों के राजा
शंकर संकट हरना ओ, शिव
हे भोले! चारों दिशाओं में तेरा ही डेरा है — धरती, आकाश, सारा जगत तेरा है। चंदा, सूरज और मैं भी तेरे ही हैं। कैलाश के वासी, पर्वत-धाराओं के राजा — हे शंकर, सभी संकट हरो।
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॥ टेक ॥
Tek — Refrain with Echo
(कैलाशों के वासी)
(धौड़ी, धारों के राजा)
मीठी-मीठी तालियाँ
शंकर संकट हरना ओ, भोले बाबा
शंकर संकट हरना
कैलाश के वासी, धाराओं के राजा — मीठी-मीठी तालियों के साथ उनका स्तुति-गान। हे भोले बाबा, हे शंकर — सभी संकट हरो।
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॥ अंतरा ॥
Antara — Inner Verse
तेरे कैलाशों का अंत ना पाया
(तेरे कैलाशों का अंत ना पाया)
तेरे कैलाशों का अंत ना पाया
(तेरे कैलाशों का अंत ना पाया)
अंत, बे-अंत तेरी माया ओ, भोले बाबा
(अंत, बे-अंत तेरी माया)
तेरे कैलाश का अंत किसी ने नहीं पाया — तेरी माया अनंत है, बे-अंत है। हे भोले बाबा, तू असीम और अपरंपार है।
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॥ समापन ॥
Samapan — Closing
ओ, शिव कैलाशों के वासी
(धौड़ी, धारों के राजा)
शंकर संकट हरना ओ, भोले बाबा
शंकर संकट हरना
हे शिव — कैलाश के वासी, धाराओं के राजा! हे भोले बाबा, हे शंकर — हमारे सभी संकट हरो, हमें अपनी शरण में लो।
🔱 शंकर संकट हरना — भजन परिचय
यह भजन भोले बाबा — भगवान शिव — की महिमा का गुणगान है। "शंकर संकट हरना" का अर्थ है — शंकर सभी संकटों को हरने वाले हैं। कैलाश पर्वत पर निवास करने वाले, धौड़ी-धाराओं के स्वामी शिव की यह अनुपम स्तुति है।
भजन में शिव की अनंत माया का वर्णन है — जिनके कैलाश का अंत कोई नहीं पा सका, जिनकी माया बे-अंत है — ऐसे भोले बाबा को मीठी-मीठी तालियों से याद किया जाता है।
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कैलाश वासीभगवान शिव का निवास कैलाश पर्वत पर है — जो हिमालय की सर्वोच्च आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र है।
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धौड़ी-धारों के राजापर्वत की धाराओं और जलप्रवाहों के स्वामी — गंगा को जटाओं में धारण करने वाले शिव।
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बे-अंत मायाशिव की माया का अंत नहीं पाया जा सकता — वे अनंत, असीम और अपरंपार हैं।
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संकट हरनाशिव संकट-मोचन हैं — अपने भक्तों के सभी कष्ट, विपदा और संकट दूर करते हैं।