✦ सर्वकार्य आरम्भ श्लोक ✦
Vakratunda Mahakaya
वक्रतुण्ड महाकाय
✦ ✦ ✦
भगवान गणेश की स्तुति का सर्वप्रसिद्ध श्लोक — करोड़ों सूर्यों के समान प्रकाशमान, विघ्नहर्ता गणपति को समर्पित। प्रत्येक शुभ कार्य के आरम्भ में पठित।
वैदिक परम्परा • सर्वकार्य आरम्भ मंत्र
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
✦ सामान्य प्रश्न — FAQ ✦
वक्रतुण्ड महाकाय श्लोक का अर्थ क्या है? ▾
हे टेढ़ी सूंड वाले, विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान प्रकाशित भगवान गणेश — कृपया मेरे सभी कार्यों में सदा-सर्वदा विघ्नों को दूर करें और मेरी रक्षा करें।
यह श्लोक कब पढ़ना चाहिए? ▾
किसी भी शुभ कार्य के प्रारम्भ में इस श्लोक का पाठ करना चाहिए — जैसे परीक्षा से पहले, नई यात्रा शुरू करने से पहले, व्यापार आरम्भ करने पर, गृह-प्रवेश, विवाह आदि संस्कारों में। प्रतिदिन प्रातःकाल भी पाठ किया जा सकता है।
इस श्लोक में "वक्रतुण्ड" का क्या अर्थ है? ▾
"वक्र" का अर्थ है टेढ़ा या घुमावदार, और "तुण्ड" का अर्थ है सूंड। "वक्रतुण्ड" का शाब्दिक अर्थ है "टेढ़ी सूंड वाले।" गणेश की टेढ़ी सूंड ॐकार की आकृति का प्रतीक मानी जाती है और यह ब्रह्माण्ड के रहस्य को दर्शाती है।
इस श्लोक को कितनी बार पढ़ना चाहिए? ▾
सामान्यतः तीन, सात या इक्कीस बार पाठ करना शुभ माना जाता है। किसी विशेष कार्य के लिए १०८ बार का जप भी किया जाता है। प्रतिदिन के पूजन में कम से कम तीन बार पाठ पर्याप्त है।
क्या इस श्लोक का पाठ महिलाएँ भी कर सकती हैं? ▾
हाँ, बिलकुल। यह श्लोक सभी के लिए है — स्त्री, पुरुष, बालक, वृद्ध। गणेश सबके देव हैं और उनकी भक्ति में किसी प्रकार का भेद नहीं है।
इस श्लोक के पाठ से क्या लाभ होता है? ▾
इस श्लोक के नियमित पाठ से जीवन के सभी कार्यों में आने वाली बाधाएँ और विघ्न दूर होते हैं। बुद्धि तेज होती है, मन में एकाग्रता आती है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। परीक्षा, व्यापार, यात्रा में सफलता मिलती है।